डेस्क: अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान की तटरेखा पर स्थित मजबूत मिसाइल ठिकानों को नष्ट कर दिया है। अमेरिकी सेना का दावा है कि इसमें 5000 पाउंड (2267 किलोग्राम) क्षमता वाले गहराई तक मार करने वाले बमों का इस्तेमाल किया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि ये ठिकाने ईरानी एंटी-शिप क्रूज मिसाइलों से लैस थे, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रहे थे। इस कार्रवाई से उस खतरे को पूरी तरह समाप्त किया गया।
सहयोगियों की बेरुखी से ट्रंप नाराज
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गहरी नाराजगी व्यक्त की थी कि नाटो और अन्य प्रमुख सहयोगियों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद करने की उनकी अपील को ठुकरा दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ यह संघर्ष पूरी दुनिया की भलाई के लिए आवश्यक है, भले ही अन्य देश उनके कदम की सराहना न करें।
एहसान फरामोशी का आरोप
ट्रंप ने शिकायत की कि यूक्रेन युद्ध के दौरान नाटो देशों ने अमेरिका से अरबों डॉलर की मदद ली, लेकिन अब अमेरिका और इजरायल की मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा। वाइट हाउस में सेंट पैट्रिक डे के अवसर पर आयरलैंड के प्रधानमंत्री मिहॉल मार्टिन से मुलाकात के दौरान ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, “हमें वास्तव में किसी की मदद की जरूरत नहीं है।” यह युद्ध अब पूरी तरह ट्रंप के फैसलों पर निर्भर हो गया है।
नाटो और यूरोपीय संघ का किनारा
दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल का परिवहन इसी जलमार्ग से होता है, फिर भी जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और चीन जैसे देशों ने इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने कहा, “यह यूरोप का युद्ध नहीं है। हमने इसे शुरू नहीं किया और हमसे कोई सलाह भी नहीं ली गई। हम नहीं जानते कि युद्ध के उद्देश्य क्या हैं और सदस्य देश इसमें नहीं घसीटे जाना चाहते।”
नाटो ने स्पष्ट किया कि यह एक रक्षात्मक गठबंधन है, आक्रामक नहीं। इसलिए अमेरिका के नेतृत्व वाले इस युद्ध में शामिल होने की कोई योजना नहीं है। ट्रंप ने सहयोगियों के रुख को “बड़ी गलती” और “नाटो के लिए गंभीर परीक्षा” करार दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वे अमेरिका को नाटो से बाहर निकालने पर विचार कर रहे हैं, तो उन्होंने कहा, “यह निश्चित रूप से सोचने वाली बात है। इसके लिए मुझे संसद की अनुमति की जरूरत नहीं।”
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अकेले यह फैसला नहीं ले सकते, क्योंकि 2023 में पारित अमेरिकी कानून के अनुसार नाटो छोड़ने के लिए संसदीय मंजूरी अनिवार्य है।













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