डेस्क:भारत की इलेक्ट्रिक वाहन (EV) और बैटरी निर्माण योजनाओं पर चीन ने आपत्ति जताई है। बीजिंग ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि भारत की नीति उसके ‘प्लेबुक’ (विकास मॉडल) की नकल है और यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का उल्लंघन करती है।
क्या है चीन का आरोप
चीन का कहना है कि भारत की नीति WTO के ‘राष्ट्रीय उपचार सिद्धांत’ (National Treatment Principle) के खिलाफ है, जो किसी भी सदस्य देश को अपने घरेलू उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अतिरिक्त लाभ देने से रोकता है। बीजिंग का दावा है कि भारत घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के नाम पर आयात प्रतिस्थापन सब्सिडी दे रहा है। चीन ने कहा कि भारत ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत वही रणनीति अपना रहा है, जो कभी चीन ने 1990–2000 के दशक में अपने घरेलू उद्योगों को मजबूत करने के लिए अपनाई थी।
चीन ने क्या कहा?
चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा, ‘भारत अब वही प्लेबुक इस्तेमाल कर रहा है, जिसे हमने सालों पहले अपनाया था। लेकिन आज वही रणनीति हमारे उद्योगों को नुकसान पहुंचा रही है।’ भारत ने चीन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ‘हमारी नीति WTO नियमों के पूरी तरह अनुरूप है और इसका उद्देश्य देश में हरित प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना है।’ भारत ने स्पष्ट किया है कि यह योजना विदेशी कंपनियों के लिए भी खुली है। कोई भी निवेशक, चाहे वह भारत का हो या विदेश का, समान शर्तों पर भाग ले सकता है।
अब आगे क्या
WTO प्रक्रिया के अनुसार, पहले दोनों देशों के बीच परामर्श होंगे। अगर बातचीत से समाधान नहीं निकलता, तो WTO एक विवाद निपटान पैनल गठित करेगा, जो इस पर औपचारिक सुनवाई करेगा। भारत ने हाल ही में ईवी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक नई सब्सिडी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत देश में ईवी और बैटरी निर्माण करने वाली कंपनियों को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। लेकिन चीन का आरोप है कि भारत इन सब्सिडियों के जरिए विदेशी कंपनियों (खासकर चीनी निर्माताओं) के लिए बाजार बंद करने की कोशिश कर रहा है।













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