नई दिल्ली: अगर देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के ग्राहक हैं तो ये खबर आपके लिए है। दरअसल, एसबीआई ने अलग-अलग टेन्योर के लिए मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट (MCLR) की दर में 10 बेसिस प्वाइंट (0.1%) की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी के बाद MCLR बेस्ड लोन लेना महंगा हो जाएगा तो ईएमआई भी पहले के मुकाबले ज्यादा देनी होगी।
कितनी हुई बढ़ोतरी
इस बढ़ोतरी से एक साल का MCLR 8.65% से बढ़कर 8.75% हो गया है। वहीं, एक महीने और तीन महीने का MCLR 8.20% से बढ़कर 8.30% है। छह महीने की MCLR अब 8.55% से बढ़कर 8.65% हो गई है। इसके अतिरिक्त, दो साल की MCLR 8.75% से बढ़ाकर 8.85% कर दी गई है। इसी तरह, तीन साल की MCLR अब 8.85% से बढ़कर 8.95% हो गई है। बता दें कि होम और ऑटो लोन सहित अधिकांश खुदरा ऋण, एक साल की MCLR दर से जुड़े होते हैं।
बता दें कि MCLR बढ़ोतरी का आरबीआई के रेपो रेट या ट्रेजरी बिल यील्ड जैसे एक्स्टर्नल बेंचमार्क से बंधे ऋण वाले लेंडर्स पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। अक्टूबर 2019 से एसबीआई सहित बैंकों को मौद्रिक नीति संचरण में सुधार के लिए नए ऋणों को इन एक्स्टर्नल बेंचमार्क से जोड़ना आवश्यक हो गया है।
इस बीच, एसबीआई ने शुक्रवार को कहा कि उसने कारोबार बढ़ाने के लिए बॉन्ड के जरिये 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर (करीब 830 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। एसबीआई ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि यह राशि वरिष्ठ असुरक्षित अस्थिर दर वाले ऋणपत्रों के जरिए जुटाई गई है। इसकी परिपक्वता अवधि तीन साल है। एसबीआई ने बताया कि ये बॉन्ड 20 जून, 2024 तक उसकी लंदन शाखा के जरिये जारी किए जाएंगे।













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