नई दिल्ली:आने वाले वक्त में बैंक अपने ग्राहकों से पैसे जमा कराने पर जोर देते नजर आ सकते हैं। दरअसल, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैंकों को सलाह दी कि वे अपने ब्रांच नेटवर्क की मदद से डिपॉजिट बनाए रखने का प्रयास करें। शक्तिकांत दास ने बैंक यह सुनिश्चित करें कि उन्हें अपनी ऋण वृद्धि को बनाए रखने और समर्थन देने के लिए पर्याप्त जमा प्राप्त हो।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि लोन और डिपॉजिट वृद्धि के बीच अंतर से लिक्विडिटी मैनेजमेंट की समस्या शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि इससे बैंकिंग प्रणाली को स्ट्रक्चरल लिक्विडिटी संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बैंकों को खुद ही यह काम करना होगा और आरबीआई इसमें मदद नहीं करेगा।
सामान्य हो रहा घरेलू बचत का बिहेवियर
इस बीच, रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा कि घरेलू बचत का बिहेवियर अब सामान्य स्थिति में लौट रहा है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान एहतियातन और खर्च करने के रास्ते बंद होने के कारण परिवारों ने वित्तीय परिसंपत्तियों में अधिक अनुपात में बचत की थी, और कोविड-19 के कम होने के साथ ही फिजिकल एसेट्स में अधिक निवेश करने की प्रवृत्ति देखी गई है। हाल ही में वित्त वर्ष 2022-23 में शुद्ध वित्तीय बचत घटकर 5.3 प्रतिशत पर आ जाने की चिंता व्यक्त की गई थी। यह चार दशक से अधिक का निचला स्तर है।
कर्ज पर कर्ज को लेकर
रिजर्व बैंक गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि होम लोन के ऊपर कर्ज (टॉप-अप) में वृद्धि सभी बैंकों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह कुछ इकाइयों तक ही सीमित है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को पर्यवेक्षी स्तर पर द्विपक्षीय रूप से निपटाया जा रहा है। बता दें कि बैंक और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) भी स्वर्ण ऋण जैसे अन्य गारंटी वाले कर्ज पर टॉप-अप की पेशकश कर रही हैं। टॉप-अप कर्ज खुदरा कर्ज के साथ-साथ होम लोन के ऊपर लिया जाने वाला कर्ज है।













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