डेस्क:बांग्लादेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और निर्णायक साबित हो सकता है। देश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) आज सोमवार को पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ चल रहे मानवता-विरोधी अपराधों के मामले में अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाने जा रही है। इस फैसले पर न केवल बांग्लादेश, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं।
हसीना पर पिछले साल ढाका में हुए भीषण विरोध प्रदर्शनों और हिंसा के दौरान मानवता के खिलाफ पांच गंभीर अपराधों के आरोप हैं। उन पर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का आदेश देने, भड़काऊ भाषण देने और निहत्थे छात्रों पर गोली चलवाने के आरोप शामिल हैं। अभियोजन पक्ष ने अदालत से उन्हें मृत्युदंड देने की मांग की है।
ट्रायल में तीन शीर्ष हस्तियां आरोपी
इस मामले में हसीना के साथ उस समय के गृह मंत्री असदुज्जामान खान कमाल और पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून भी ट्रायल का हिस्सा रहे। दोनों को अदालत ने फरार आरोपी घोषित किया है। उल्लेखनीय है कि शेख हसीना पिछले वर्ष हुई हिंसा के बाद से भारत में शरण ले चुकी हैं।
“1400 मौतों की सजा की हकदार हसीना”
ICT के चीफ प्रॉसिक्यूटर मोहम्मद ताजुल इस्लाम ने कहा कि हसीना की सरकार की कार्रवाई से करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा —
“शेख हसीना 1,400 मौत की सजा की हकदार हैं। यह संभव नहीं कि हम हर मौत के लिए सजा दें, लेकिन कम से कम एक डेथ पेनल्टी की मांग हम करते हैं।”
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2024 तक इन झड़पों में 800 से अधिक लोगों की मौत और करीब 14,000 घायल हुए थे।
आरोपों की पूरी सूची
23 अक्टूबर को पूरी हुई 28 दिन की सुनवाई में 54 गवाहों ने गवाही दी। ट्रिब्यूनल में दर्ज आरोपों में शामिल हैं —
- हत्या, हत्या का प्रयास और टॉर्चर,
- प्रदर्शनकारियों के सफाए का आदेश,
- भड़काऊ बयान देना और छात्रों पर हथियारों से हमला करवाना,
- निहत्थे प्रदर्शनकारियों की गोली मारकर हत्या।
फैसले से पहले दहशत और सन्नाटा
ढाका सहित कई हिस्सों में तनाव और हिंसा की स्थिति है। पूर्व सत्तारूढ़ पार्टी अवामी लीग ने ट्रायल के विरोध में देशव्यापी लॉकडाउन का ऐलान किया है। कई शहरों में बम फेंके जाने और आगजनी की घटनाओं की खबरें आई हैं।
सुरक्षा को देखते हुए स्कूल-कॉलेज बंद कर दिए गए हैं, सार्वजनिक परिवहन प्रभावित है, और ट्रिब्यूनल कॉम्प्लेक्स के आसपास सेना की तैनाती बढ़ा दी गई है।
आज का फैसला न केवल शेख हसीना के राजनीतिक भविष्य, बल्कि बांग्लादेश के लोकतांत्रिक संतुलन की दिशा भी तय करेगा।













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