डेस्क: लंबे समय से अपनी ही पार्टी के खिलाफ अपनी राय रखने वाले केसी त्यागी ने जनता दल यूनाइटेड (जदयू) से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा सोशल मीडिया पर साझा करते हुए स्पष्ट किया कि अब वे जदयू की प्राथमिक सदस्यता भी नहीं लेंगे।
अपने इस्तीफे में केसी त्यागी ने पार्टी में बिताए अपने वर्षों और भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि 30 अक्टूबर 2003 को जदयू का गठन हुआ, जब समता पार्टी और जनता दल का विलय हुआ। उस समय जॉर्ज फर्नांडिस अध्यक्ष और केसी त्यागी महासचिव थे। उन्होंने शरद यादव और नीतीश कुमार की अध्यक्षता में भी काम किया और पार्टी में मुख्य प्रवक्ता तथा राजनीतिक सलाहकार के रूप में भूमिका निभाई। इस्तीफे में उन्होंने नीतीश कुमार के प्रति अपना सम्मान हमेशा बरकरार रहने का भी भरोसा दिया।
केसी त्यागी ने आगे बताया कि उनके कुछ राजनीतिक साथी, समर्थक और वर्कर 22 मार्च को एक बैठक आयोजित करेंगे, जिसमें देश के राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि इस बैठक के बाद वे अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केसी त्यागी मूल रूप से उत्तर प्रदेश से हैं और पश्चिमी यूपी में उनके कई समर्थक हैं। इस कारण संभावना जताई जा रही है कि अब वे उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हो सकते हैं।
जदयू के दिग्गज नेताओं में शुमार केसी त्यागी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते थे और पार्टी के पक्ष में हर मंच पर मजबूती से अपनी बात रखते थे। इस साल उन्होंने नीतीश कुमार को भारत रत्न देने की मांग भी की थी और पीएम मोदी को पत्र लिखा था। लेकिन लंबे समय से पार्टी ने केसी त्यागी से दूरी बना रखी थी।
केसी त्यागी ने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को हटाने के फैसले का विरोध किया और फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी भारत सरकार के स्टैंड से अलग नजर आए। पार्टी में लगातार तवज्जो न मिलने के संकेत मिलने के बाद अब उन्होंने स्वयं जदयू से इस्तीफा देने का निर्णय लिया।













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