सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने सोमवार को कहा कि वह सिंधु जल संधि के तहत अपने हिस्से के पानी को सुनिश्चित करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। पाकिस्तानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उसके हिस्से के जल प्रवाह को रोकने या मोड़ने की कोई कोशिश की गई तो इसे युद्ध की कार्रवाई के रूप में देखा जाएगा।
पाकिस्तान सेना की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की अध्यक्षता में हुई 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में देश की सुरक्षा स्थिति और जल मुद्दे पर चर्चा की गई। बैठक में यह संकल्प लिया गया कि सरकार के निर्देशों और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप पाकिस्तान के हिस्से का पानी प्राप्त करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे।
जल रोकने की कार्रवाई को बताया जाएगा ‘युद्ध का कदम’
बैठक में 24 अप्रैल 2025 को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक के फैसलों की भी पुष्टि की गई। उस बैठक में पाकिस्तान ने कहा था कि उसके हिस्से के पानी को रोकने या उसके प्रवाह को बदलने की किसी भी कार्रवाई को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा।
कोर कमांडर्स ने देश की मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों, संचालन क्षमता और पेशेवर दक्षता पर संतोष जताया। बैठक में अफगानिस्तान के तालिबान नियंत्रित क्षेत्रों से सक्रिय आतंकी संगठनों को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई और कहा गया कि इन क्षेत्रों का इस्तेमाल पाकिस्तान में हमलों के लिए किया जा रहा है।
पहले भी भारत पर लगाए थे आरोप
इससे पहले 2 जुलाई को पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने के भारत के फैसले पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत आतंकवाद के मुद्दे को आधार बनाकर पाकिस्तान के जल अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है।
पाकिस्तान ने दावा किया कि सिंधु जल संधि एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है और इसे कोई भी पक्ष एकतरफा तरीके से निलंबित या समाप्त नहीं कर सकता। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इसहाक डार ने भी कहा था कि यह संधि ‘वैध, बाध्यकारी और प्रभावी’ बनी हुई है।
भारत का रुख स्पष्ट- संधि फिलहाल स्थगित
भारत ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज करते हुए अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय का कहना है कि सिंधु जल संधि फिलहाल स्थगित है और यह फैसला पाकिस्तान की ओर से लगातार सीमा पार आतंकवाद को समर्थन दिए जाने के जवाब में लिया गया है।
पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कई कड़े कदम उठाए थे। इनमें 1960 में हुई सिंधु जल संधि को स्थगित करने का निर्णय भी शामिल था। इस संधि के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के जल उपयोग और वितरण की व्यवस्था तय की गई थी।
क्या है सिंधु जल संधि?
विश्व बैंक की मध्यस्थता से वर्ष 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की नदियों के पानी के उपयोग और बंटवारे के नियम तय किए गए।
संधि के अनुसार पूर्वी नदियां- रावी, ब्यास और सतलुज का अधिकतर उपयोग भारत के लिए तथा पश्चिमी नदियां- सिंधु, झेलम और चिनाब का अधिकांश जल पाकिस्तान के उपयोग के लिए निर्धारित किया गया था। दशकों तक यह समझौता दोनों देशों के बीच जल संबंधों का आधार रहा है, लेकिन हाल के वर्षों में आतंकवाद और सीमा विवादों के चलते इस पर तनाव बढ़ गया है।













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