डेस्क : मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और घरेलू LPG संकट के बीच कांग्रेस के भीतर गुटबंदी अब सार्वजनिक हो गई है। लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की विदेश नीति और घरेलू ऊर्जा सुरक्षा पर तीखी प्रतिक्रिया दी, लेकिन पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता उनके रुख से अलग नजर आए।
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार की विदेश नीति “कमज़ोर और समझौता करने वाली” दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों को मजबूती से निभाना चाहिए था। इसके साथ ही उन्होंने LPG संकट और तेल आपूर्ति पर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा, कहा कि जनता को असुरक्षित महसूस कराया जा रहा है।
लेकिन कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की लाइन से हटकर मोदी सरकार के रुख का समर्थन करते दिखाई दिए। शशि थरूर, आनंद शर्मा और मनीष तिवारी ने कहा कि सरकार की विदेश नीति संतुलित और जिम्मेदार रही है और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा गया है।
कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी पार्टी की लाइन से अलग बयान देते हुए कहा कि देश में LPG की आपूर्ति सुरक्षित है और यह केवल मीडिया में माहौल बनाया गया है। उनका यह बयान भाजपा के लिए भी राजनीतिक लाभ का साधन बन गया।
केंद्र सरकार ने भरोसा दिलाया है कि कच्चा तेल और LPG की आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और लोगों से पैनिक बायिंग न करने की अपील की है।
राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि इस मामले से कांग्रेस के भीतर राष्ट्रीय हित बनाम पार्टी लाइन की बहस और मतभेद सार्वजनिक हो गए हैं। भाजपा इसे अपनी राजनीतिक बढ़त के रूप में पेश कर रही है और दावा कर रही है कि कांग्रेस के अपने ही वरिष्ठ नेता सरकार के रुख से सहमत हैं, जिससे राहुल गांधी अलग-थलग नजर आते हैं।













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