नई दिल्ली:तेल कंपनियां फिलहाल आम जनता को पेट्रोल व डीजल की कीमतों राहत देने के मूड में नजर नहीं आ रही हैं। इन कंपनियों का दावा है कि क्रूड की कीमतों में हाल के महीनों में भारी गिरावट होने के बावजूद उन्हें अभी घरेलू बाजार में डीजल बेचने पर नौ रुपये प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ा है। यही नहीं चालू वित्त वर्ष के दौरान इन कंपनियों की तरफ से पेट्रोलियम मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय से 50 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी की मांग भी की है।
इस पर वित्त मंत्रालय क्या फैसला करता है यह तो 01 फरवरी, 2023 को पता चलेगा जब आम बजट पेश होगा लेकिन दोनो मंत्रालयों के बीच चल रहे संवाद को देखते हुए सस्ते क्रूड का फायदा आम जनता को देने की संभावना कम नजर आ रही है। पेट्रोलियम मंत्रालय का डाटा बताता है कि दिसंबर, 2022 में भारतीय तेल कंपनियों ने 78.1 डॉलर प्रति बैरल की दर से कच्चे तेल की खरीद की है।
जबकि नवंबर, 2022 में 87.55 डॉलर प्रति बैरल, अक्टूबर में 91.7 डॉलर, सितंबर में 90.71 डॉलर, अगस्त में 97.4 डॉलर, जुलाई में 105.49 डॉलर, जून में 116.01 डॉलर, मई में 109.51 डॉलर और अप्रैल, 2022 में 102.97 डॉलर प्रति बैरल रही थी। देश में सरकारी तेल कंपनियों ने अंतिम बार कीमत 06 अप्रैल, 2022 को बढ़ाई थी। इन कंपनियों का कहना है कि उसके बाद भी उन्होंने महंगा क्रूड खरीदा लेकिन आम जनता पर कोई बोझ नहीं डाला।
यह बात जुलाई तक सही नजर आती है। लेकिन अगस्त, 2022 के बाद से भारत ने अप्रैल, 2022 के मुकाबले सस्ते दर पर क्रूड की खरीद की है। इस बारे में सरकारी तेल कंपनियों के सूत्रों का कहना है कि पिछले दो महीनों से भारत में पेट्रोल की बिक्री में मुनाफा हो रहा है लेकिन डीजल पर अभी भी नौ रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा है। पूरे वित्त वर्ष के दौरान तेल कंपनियों को लागत से कम कमीत पर पेट्रोल व डीजल बेचने से 1.50 लाख करोड़ रुपये की अंडररिकवरी होने का दावा किया जा रहा है। इसकी भरपाई के लिए सरकार से सब्सिडी की मांग की गई है। सनद रहे कि नवंबर, 2022 में केंद्र सरकार ने इन कंपनियों को 22 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी दी थी।
सरकार ने घरेलू कच्चे तेल, डीजल, एटीएफ निर्यात पर टैक्स लगायाजागरण ब्यूरो, नई दिल्लीकेंद्र सरकार ने एक बार फिर घरेलू फील्डों से निकाले जाने वाले क्रूड पर विंडफॉल टैक्स की दरें को बढ़ा दिया है। साथ ही डीजल व एटीएफ निर्यात पर भी विंडफॉल की दरें बढ़ा दी गई हैं। यह फैसला हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रो उत्पादों की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए उठाया गया है।
सरकार का मानना है कि घेरलू पेट्रो उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई कीमतों के आधार पर बेच कर कंपनियां ज्यादा मुनाफा कमा रही हैं इसलिए उन पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जा रहा है। क्रूड पर विंडफॉल टैक्स की नई दर 1700 रुपये प्रति टन से बढ़ा कर 2100 रुपये प्रति टन कर दिया गया है। इसी तरह से डीजल निर्यात पर उक्त टैक्स की दर को पांच रुपये से बढ़ा कर 6.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। एटीएफ निर्यात पर टैक्स की दर 1.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ा कर 4.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।













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