डेस्क : सीमेंट उद्योग के लिए निकट भविष्य में बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) निवेश की रफ्तार, संभावित मूल्य वृद्धि और बढ़ती उत्पादन लागत प्रमुख कारक बने रहेंगे। ब्रोकरेज फर्म नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार मई 2026 में अधिकांश क्षेत्रों में सीमेंट की मांग सुस्त रही, जबकि बढ़ती लागत के कारण कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मई के दौरान श्रमिकों की कमी और प्रतिकूल मौसम के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में सीमेंट की मांग कमजोर रही। हालांकि पश्चिमी क्षेत्र में मांग में सुधार देखने को मिला। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों के प्रभाव से मांग कमजोर बनी रही, जबकि बिहार में हल्का सुधार दर्ज किया गया। हालांकि वहां कच्चे माल की कमी और बेमौसम बारिश के कारण आपूर्ति प्रभावित रही।
दक्षिण भारत में चुनावों से जुड़ी श्रमिक कमी और असामयिक वर्षा के कारण मांग सुस्त रही। वहीं उत्तरी क्षेत्र में भी श्रमिकों की कमी के चलते मांग कमजोर रही, जबकि मध्य भारत में मांग में मामूली सुधार दर्ज किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार मई में जिन मूल्यवृद्धियों की उम्मीद की जा रही थी, वे अधिकांश क्षेत्रों में कमजोर मांग के कारण लागू नहीं हो सकीं। हालांकि अप्रैल में की गई मूल्यवृद्धि अब तक बरकरार है। बिहार में बेहतर मांग और सीमित आपूर्ति के चलते मई में सीमेंट की कीमतों में 5 से 10 रुपये प्रति बैग की बढ़ोतरी हुई। पश्चिम बंगाल, दक्षिण, उत्तर और मध्य क्षेत्रों में अप्रैल की बढ़ोतरी के बाद कीमतें लगभग स्थिर रहीं।
डीलरों को उम्मीद है कि जून में उत्तर, मध्य और पश्चिम भारत में सीमेंट की कीमतों में करीब 10 रुपये प्रति बैग की बढ़ोतरी की जा सकती है। दक्षिण भारत में गैर-व्यावसायिक (नॉन-ट्रेड) खंड में प्रस्तावित 10 रुपये प्रति बैग की बढ़ोतरी मई में लागू नहीं हो सकी।
नुवामा ने कहा कि पेटकोक और पैकेजिंग लागत में वृद्धि उद्योग के लिए प्रमुख चुनौती बनी हुई है। हाल के उच्च स्तर से पेटकोक की कीमतें घटकर 151 डॉलर प्रति टन पर आ गई हैं, लेकिन यह अब भी तिमाही आधार पर 25 डॉलर प्रति टन अधिक है। ईंधन लागत में बढ़ोतरी का प्रभाव वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत और दूसरी तिमाही से अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देने की संभावना है।
ब्रोकरेज के अनुसार भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं भी आवासीय मांग को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर खर्च की दिशा और बढ़ती लागतें सीमेंट कंपनियों के मार्जिन तथा शेयर कीमतों पर निकट अवधि में महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में सीमेंट उद्योग की लाभप्रदता इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियां मूल्यवृद्धि को कितनी सफलतापूर्वक लागू कर पाती हैं और आवास एवं बुनियादी ढांचा क्षेत्र में खर्च की गति कैसी रहती है।













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