डेस्क : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज वैश्विक नवाचार को दिशा देने वाले देशों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने भारत के विशाल जनसांख्यिकीय लाभ, अनुसंधान क्षमता और मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम को विश्व तकनीकी प्रगति का प्रमुख आधार बताया।
फ्रांस के नीस शहर में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम के दौरान यह टिप्पणी उस समय सामने आई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उपस्थित थे। इस अवसर पर दोनों देशों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वच्छ ऊर्जा, वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
भारत की तकनीकी शक्ति की सराहना
राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि 1.4 अरब की आबादी वाला भारत हर वर्ष लाखों इंजीनियर तैयार कर रहा है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी तकनीकी प्रतिभा आपूर्ति का संकेत है। उन्होंने कहा कि भारत अब केवल नवाचार में भागीदार नहीं, बल्कि नवाचार की दिशा तय करने वाला देश बन चुका है।
उन्होंने कहा, “अब प्रश्न यह नहीं है कि भारत नवाचार कर सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि भारत के साथ कौन नवाचार करेगा।”
भारत-फ्रांस साझेदारी का विस्तार
मैक्रों ने कहा कि भारत और फ्रांस के संबंध साझा मूल्यों और नवाचार आधारित सहयोग पर टिके हैं। उन्होंने ‘भारत इनोवेट्स’ पहल को दोनों देशों के स्टार्टअप, निवेशकों और शोध संस्थानों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मंच बताया।
नीस में आयोजित यह सम्मेलन ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ के तहत पहली प्रमुख वैश्विक पहल है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच तकनीकी और औद्योगिक सहयोग को नई गति देना है।
भारत इनोवेट्स 2026 में भारत, फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स तथा निवेशकों ने भाग लिया।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और खुला नवाचार
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में वैश्विक प्रतिस्पर्धा का उल्लेख करते हुए मैक्रों ने कहा कि कुछ देश एआई तकनीक को सीमित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं, लेकिन भारत और फ्रांस खुले, बहुभाषी और सहयोगात्मक एआई मॉडल के पक्षधर हैं।
उन्होंने कहा कि तकनीक को वैश्विक भलाई और साझा विकास के लिए उपयोग किया जाना चाहिए, न कि उसे सीमित दायरे में बांधा जाना चाहिए।
जलवायु और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग
राष्ट्रपति मैक्रों ने जलवायु परिवर्तन और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में दोनों देशों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और जैतापुर परमाणु परियोजना सहित छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर तकनीक में सहयोग का उल्लेख किया।
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन को उन्होंने स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्य हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि भारत और फ्रांस मिलकर कार्बन उत्सर्जन में कमी और सतत विकास के लक्ष्यों की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं।













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