डेस्क : तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में आंतरिक मतभेद एक बार फिर सामने आ गए हैं। पार्टी के कुछ सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को लिखे गए पत्र के बाद संगठन में विवाद की स्थिति बन गई है। इस घटनाक्रम ने संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हलचल बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के एक धड़े ने लोकसभा में अलग संसदीय समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस समूह ने दावा किया है कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल मौजूद है और वे सदन में एक स्वतंत्र पहचान चाहते हैं। साथ ही, इस धड़े की ओर से एनडीए को समर्थन देने की बात भी सामने आई है।
इसी बीच टीएमसी नेतृत्व की ओर से इस कदम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी गई है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया है कि किसी भी अलग समूह को मान्यता न दी जाए। उनका कहना है कि इससे पार्टी की एकता और संसदीय अनुशासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ देखने को मिल रही हैं। वरिष्ठ नेता किर्ती आज़ाद ने इस विवाद को आंतरिक मतभेद बताया है, जबकि अन्य नेताओं का मानना है कि यह स्थिति संगठनात्मक अनुशासन के लिए चुनौती बन सकती है। कुछ सांसदों के रुख को लेकर भी पार्टी में असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम टीएमसी के भीतर लंबे समय से चल रहे आंतरिक तनाव का परिणाम हो सकता है। यदि यह विवाद बढ़ता है तो इसका असर संसद में पार्टी की एकजुटता और उसकी राजनीतिक रणनीति पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल यह मामला लोकसभा अध्यक्ष के विचाराधीन है, और उनके निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हैं।













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