नई दिल्ली:जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को अंतिम विदाई देने प्रधानमंत्री मोदी 27 सितंबर को जापान जाएंगे। आबे को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। 8 जुलाई को गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 17 जुलाई को उनके परिवार ने आबे का अंतिम संस्कार किया था। हालांकि अब उनको राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी जिसमें दुनियाभर के कई बड़े नेता शामिल होंगे। वहीं इस राजकीय सम्मान का जापान में विरोध भी हो रहा है। एक दिन पहले ही एक 70 साल के बुजुर्ग ने विरोध जताते हुए आत्मदाह करने का कोशिश की थी।
मोदी और आबे की दोस्ती, मिल चुका है पद्म विभूषण
समाज की सेवा के लिए शिंजो आबे को पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है। पीएम मोदी और आबे की दोस्ती के बारे में भी सभी जानते हैं। पीएम मोदी ने इस साल मई में भी उनसे मुलाकात की थी। 2018 की जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री आबे के घर भी गए थे और उनके परिवार से मिले थे। आबे के कार्यकाल में भारत और जापाने के संबंध मजबूत हुए।
हत्या के बाद भारत में हुई थी राष्ट्रीय शोक की घोषणा
शिंजो आबे को जापाने के नारा शहर में एक कैंपेन के दौरान गोली मारी गई थी। गोली लगने के बाद वह होश में थे। वहीं उनके आसपास ज्यादा सुरक्षा नहीं थी। आबे को अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। भारत में उनकी हत्या के बाद एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की गई थी।
राजकीय अंतिम संस्कार का विरोध क्यों
जापान में किसी के राजकीय अंतिम संस्कार की परंपरा नहीं है। इससे पहले 1967 में केवल शिगेरू योशिदा (पूर्व प्रधानमंत्री) का अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया था। वहां के लोग इस तरह के आयोजन को पैसे की बर्बादी बताते हैं। बताया जा रहा है कि इस अंतिम संस्कार में सरकार 910 करोड़ रुपये खर्च करेगी। पहले बताया जा रहा था कि खर्च सत्ताधारी पार्टी वहन करेगी। हालांकि बाद में कहा गया कि सरकारी खर्च पर आयोजन होगा। शिंजो आबे ने 2011 की सुनामी के दौरान बड़ी भूमिका निभाई थी। उनकी लोकप्रियता की वजह से सरकारी राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बताया जा रहा है कि इसमें 190 देशों के 6400 लोग शामिल हो सकते हैं।













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