स्पोर्ट्स डेस्क: भारत के विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव ने हाल ही में एक स्पेशल पॉडकास्ट इंटरव्यू में अपनी क्रिकेट प्राथमिकताओं और अनुभवों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उन्हें टेस्ट क्रिकेट खेलने की इच्छा है, जबकि वनडे उनका सबसे पसंदीदा प्रारूप नहीं है। टी20 क्रिकेट उनके लिए सहज हो गया है और इसे खेलते हुए उन्हें पूरी तरह आत्मविश्वास महसूस होता है।
इंटरव्यू के दौरान सूर्यकुमार ने मुंबई की खास अंदाज़ में कहा, ‘हाथ सेट हो गया है,’ जिसका मतलब था कि वह टी20 के छोटे प्रारूप के उस्ताद बन चुके हैं। उन्होंने अपने टेस्ट क्रिकेट अनुभव और वनडे में प्रयासों के बारे में भी खुलकर बताया।
सूर्यकुमार ने कहा, “मैंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेला था, जिसमें केवल एक पारी खेल पाया। मेरी लाल गेंद से क्रिकेट की शुरुआत 2010-11 में हुई और मैंने 10-12 साल तक रणजी ट्रॉफी खेली। मुंबई में पले-बढ़े खिलाड़ियों की तरह मेरी शुरुआत लाल गेंद से हुई, इसलिए इस प्रारूप से मेरा गहरा लगाव है। अगर मौका मिले तो मैं टेस्ट क्रिकेट जरूर खेलना चाहूंगा।”
हालांकि 35 साल की उम्र में टेस्ट टीम में जगह बनाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। उनका एकमात्र टेस्ट अनुभव 2023 में नागपुर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रहा, जिसमें उन्होंने एक पारी में आठ रन बनाए।
टी20 और वनडे के अंतर पर चर्चा करते हुए सूर्यकुमार ने कहा कि वनडे क्रिकेट उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा। “इसमें तीन तरह की बल्लेबाजी करनी पड़ती है—शुरुआत टेस्ट की तरह, बीच का हिस्सा वनडे की तरह और अंत में टी20 की तरह। इसलिए मैं कभी पूरी तरह इसे समझ नहीं पाया। मैंने प्रयास किया, लेकिन यह मुश्किल प्रारूप है।”
उन्होंने वनडे विश्व कप 2023 के माहौल और तैयारी को याद करते हुए कहा कि यह अनुभव टी20 विश्व कप से बिल्कुल अलग था।
विशेषज्ञ भी वनडे की गिरती लोकप्रियता पर चिंता जता रहे हैं। दिग्गज स्पिनर रविचंद्रन अश्विन के अनुसार, वनडे धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान वसीम अकरम ने इसे पूरी तरह खत्म करने की सलाह दी थी, जबकि इंग्लैंड के केविन पीटरसन मानते हैं कि टी20 के विस्तार के कारण 50 ओवर का क्रिकेट सबसे अधिक खतरे में है।
सूर्यकुमार ने यह भी साफ किया कि टी20 में उन्हें मज़ा आता है और इस प्रारूप में उनका आत्मविश्वास पूरी तरह बन चुका है। “टी20 क्रिकेट में मेरा हाथ सेट हो गया है, और मैं इसे खेलते हुए सहज महसूस करता हूँ।”
इस इंटरव्यू ने एक बार फिर साबित किया कि सूर्यकुमार यादव न केवल टी20 के मास्टर हैं, बल्कि उनके दिल में टेस्ट क्रिकेट खेलने का सपना अभी भी जिंदा है।













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