डेस्क: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुए चुनाव के परिणाम ने राज्य की सियासत में हलचल मचा दी है। मतगणना में एनडीए ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि महागठबंधन को गंभीर झटका लगा है। खासतौर पर पांचवीं सीट का मुकाबला काफी नजदीकी और तनावपूर्ण रहा, जिसके लिए वोटों की दोबारा गिनती तक करानी पड़ी।
मतदान में एनडीए के सभी 202 विधायकों ने भाग लिया, लेकिन महागठबंधन के चार विधायक—कांग्रेस के तीन और आरजेडी के एक—मतदान के लिए विधानसभा में उपस्थित नहीं हुए। इन विधायकों के वोट न डालने का असर सीधे परिणाम पर पड़ा और महागठबंधन के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस हार के पीछे विधायकों के अनुपस्थिति को अहम कारण बताया। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया है। बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि जिन विधायकों ने महागठबंधन के पक्ष में मतदान नहीं किया, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस मामले की विस्तृत रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी।
राजेश राम ने कहा, “जिन विधायकों ने मतदान नहीं किया, उनके इस कदम से लोकतंत्र शर्मसार हुआ है। मतदान से एक दिन पहले तक ये विधायक पार्टी नेतृत्व के संपर्क में थे, लेकिन अचानक गायब हो जाना कई सवाल खड़े करता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने विधायकों पर दबाव डाला या उन्हें हाउस अरेस्ट किया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, एनडीए की यह पूर्ण सफलता मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के नेतृत्व के लिए एक बड़ी जीत है। एनडीए के पांचों प्रत्याशियों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन पहली बार राज्यसभा जाएंगे। जदयू के रामनाथ ठाकुर और आरएलएम के उपेंद्र कुशवाहा दूसरी बार चुने गए हैं, वहीं भाजपा के शिवेश राम ने भी जीत दर्ज की।
इस जीत से बिहार में आगामी सियासी समीकरणों पर असर पड़ेगा और महागठबंधन के भीतर नेतृत्व और रणनीति पर नए सवाल उठेंगे।













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