अगर आप कॉफी के शौकीन हैं तो स्टारबक्स का नाम जरूर सुना होगा। मेट्रो सिटीज में स्टारबक्स की काफी लोकप्रियता है। टाटा ग्रुप की इस कंपनी (Tata Starbucks) को खास पहचान देने में 33 वर्षीय अवनि दावड़ा (Starbucks CEO Avani Saglani Davda) ने खास भूमिका निभाई। वह टाटा ग्रुप (Tata Group) में सबसे कम उम्र की सीईओ रह चुकी हैं। आज हम आपको बताएंगे कि कैसे अवनि दावड़ा ने कम उम्र में इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।
कहां से की पढ़ाई
अवनि दावड़ा का जन्म और पालन-पोषण मुंबई में हुआ। उन्होंने प्रतिष्ठित एच.आर. कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स से पढ़ाई की। यहां से ग्रेजुएट होने के बाद अवनि ने नरसी मोनजी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में अपनी मास्टर डिग्री पूरी की।
अवनि ने साल 2002 में ग्रेजुएशन के बाद कॉर्पोरेट सेक्टर में अपना पहला कदम रखा। उन्होंने प्रतिष्ठित टाटा एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विसेज (टीएएस) में आवेदन किया। टाटा समूह की अलग-अलग कंपनियों में शानदार परफॉर्मेंस की वजह से वह आगे बढ़ती गईं। टाटा समूह की कंपनी इंडियन होटल्स और इनफिनिटी रिटेल लिमिटेड के साथ काम करते हुए उन्होंने अपने काम से मैनेजमेंट को प्रभावित किया।
आरके कृष्ण कुमार का भरोसा
अवनी दावड़ा को करियर में आगे बढ़ने के लिए टाटा संस के पूर्व डायरेक्टर और रतन टाटा के बेहद करीबी माने जाने वाले आरके कृष्ण कुमार का मार्गदर्शन मिला। आरके कृष्ण कुमार ने अवनि को टाटा ग्लोबल बेवरेजेज लिमिटेड और स्टारबक्स कॉफी कंपनी के बीच ज्वाइंट वेंचर का नेतृत्व करने के लिए चुना। अवनि दावड़ा टाटा स्टारबक्स के सीईओ के तौर पर नियुक्त की गईं, जो टाटा समूह के इस ब्रांड के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ।
अवनि ने इस ब्रांड को लोकप्रिय बनाने के अलावा फाइनेंशियल कंडीशन को मजबूत किया। बता दें कि टाटा स्टारबक्स ने हाल ही में 1000 करोड़ रुपये के राजस्व का आंकड़ा पार कर लिया है। टाटा स्टारबक्स के सीईओ के रूप में अपने सफल कार्यकाल के बाद अवनि दावड़ा ने गोदरेज इंडस्ट्रीज लिमिटेड की सहायक कंपनी गोदरेज नेचर बास्केट लिमिटेड में मैनेजिंग डायरेक्टर की भी भूमिका निभाई।













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