डेस्क:देश के 52वें मुख्य न्यायधीश का पद संभाल रहे जस्टिस बी आर गवई ने शुक्रवार को कहा है कि वह सेवानिवृत्ति के बाद कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करेंगे। जस्टिस गवई ने बीते मई के महीने में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में शपथ ली थी। वहीं उनका कार्यकाल इस साल नवंबर में खत्म होने जा रहा है।
सीजेआई शुक्रवार को महाराष्ट्र के अमरावती जिले में अपने पैतृक गांव दारापुर में आयोजित एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘‘मैंने फैसला कर लिया है कि सेवानिवृत्ति के बाद मैं कोई सरकारी पद स्वीकार नहीं करूंगा।” उन्होंने आगे भविष्य की योजना के बारे में भी बताया। सीजेआई ने कहा कि वे सेवानिवृत्ति के बाद अपने होम टाउन में अधिक से अधिक समय बिताएंगे। उन्होंने कहा, “ रिटायरेंट के बाद मुझे अधिक समय मिलेगा, इसलिए मैं दारापुर, अमरावती और नागपुर में अधिक समय बिताने का प्रयास करूंगा।’’
इससे पहले जस्टिस गवई का पैतृक गांव में जोर शोर से स्वागत हुआ। सीजेआई ने यहां अपने पिता, केरल और बिहार के पूर्व राज्यपाल आर एस गवई के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और परिवार के कुछ सदस्यों के साथ उनकी पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। वहीं गवई ने दारापुर के रास्ते पर बनने वाले एक भव्य द्वार की आधारशिला भी रखी, जिसका नाम आर.एस. गवई के नाम पर रखा जाएगा।
गौरतलब है कि 14 मई को चीफ जस्टिस पद की शपथ लेने वाले जस्टिस गवई देश के महज दूसरे दलित चीफ जस्टिस हैं। महाराष्ट्र में अमरावती में जन्मे जस्टिस गवई 2003 में बॉम्बे हाईकोर्ट का हिस्सा बने थे। इसके बाद वे 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के जज बने थे।













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