डेस्क: थाईलैंड और कंबोडिया के बीच लंबे समय से चल रहे सीमा विवाद ने एक बार फिर उग्र रूप धारण कर लिया है। लगातार दूसरे दिन दोनों देशों के बीच भीषण गोलीबारी और रॉकेट हमले हुए, जिसमें दर्जनों नागरिकों की जान गई और हजारों को अपने घर छोड़ने पड़े। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में कंबोडिया ने तत्काल और बिना शर्त युद्धविराम की मांग की है।
यूएन में कंबोडिया की अपील:
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक के बाद कंबोडियाई राजदूत छेआ केओ ने कहा, “हमने बिना किसी शर्त के तुरंत युद्धविराम की मांग की है और विवाद के शांतिपूर्ण समाधान की भी अपील की है।” इस बैठक में थाईलैंड और कंबोडिया, दोनों देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
दोनों ओर से भारी नुकसान:
थाईलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 14 नागरिक और एक सैनिक शामिल हैं, जबकि 46 लोग घायल हुए हैं। दूसरी ओर, कंबोडिया के ओडार मींचे प्रांत में एक 70 वर्षीय नागरिक की मौत और पांच अन्य घायल होने की खबर है।
भीषण संघर्ष के दृश्य:
थाई सेना के अनुसार, शुक्रवार तड़के 4 बजे (गुरुवार रात 9 बजे GMT) से तीन इलाकों में संघर्ष फिर शुरू हुआ। कंबोडिया ने भारी हथियारों, तोपों और BM-21 रॉकेट सिस्टम से हमला किया, जबकि थाई सेना ने जवाबी गोलीबारी की। थाई वायुसेना ने अपने F-16 लड़ाकू विमानों से कंबोडियाई ठिकानों पर हमला भी किया।
राजनयिक समाधान के संकेत:
थाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता निकोर्नडे बालनकुरा ने बताया कि शुक्रवार दोपहर तक संघर्ष कुछ शांत हुआ और थाईलैंड कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, “अगर कंबोडिया द्विपक्षीय या मलेशिया जैसे किसी तीसरे पक्ष की मदद से बातचीत करना चाहता है, तो हम तैयार हैं।”
ASEAN की भूमिका:
मलेशिया इस समय दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन (ASEAN) का अध्यक्ष है, जिसके दोनों देश सदस्य हैं। ऐसे में मलेशिया की भूमिका मध्यस्थ के तौर पर महत्वपूर्ण हो सकती है।
युद्ध की चेतावनी:
थाईलैंड के कार्यवाहक प्रधानमंत्री फूमथाम वेचायाचाई ने आगाह किया कि “अगर हालात बिगड़े तो यह युद्ध में बदल सकता है। फिलहाल, यह सीमित झड़पों तक सिमटा है।”
संघर्ष का इतिहास:
दोनों देशों के बीच 800 किलोमीटर लंबी सीमा का कई हिस्सों को लेकर विवाद है। 2008 से 2011 के बीच भी इस मुद्दे पर हिंसक झड़पें हो चुकी हैं, जिनमें कम से कम 28 लोगों की मौत हुई थी। 2013 में अंतरराष्ट्रीय अदालत ने विवाद सुलझाया था, लेकिन मई 2025 में एक कंबोडियाई सैनिक की मौत के बाद फिर तनाव शुरू हुआ।
सीमा पर डर और पलायन:
कंबोडिया के सीमावर्ती शहर समरोंग में भारी गोलीबारी के बीच स्थानीय लोग अपने बच्चों और सामान के साथ सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।
41 वर्षीय प्रो बाक ने एएफपी को बताया, “मैं सीमा के बेहद पास रहता हूं। हम बहुत डरे हुए हैं।” वह अपने परिवार को एक बौद्ध मंदिर में शरण दिलाने ले जा रहे थे।
निष्कर्ष:यह संघर्ष न सिर्फ क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बन गया है, बल्कि ASEAN की एकता और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब निगाहें इस पर हैं कि कूटनीति इस बार हिंसा को कैसे रोक पाती है।













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