डेस्क:अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों को नागरिकता देने के संवैधानिक अधिकार पर ट्रंप प्रशासन की चुनौती को एक बार फिर न्यायपालिका ने खारिज कर दिया है। शुक्रवार को संघीय न्यायाधीश लियो सोरोकिन ने ट्रंप प्रशासन के उस कार्यकारी आदेश को रोक दिया, जो अवैध प्रवासियों के बच्चों को जन्मसिद्ध नागरिकता देने की प्रक्रिया को खत्म करने की कोशिश कर रहा था।
यह तीसरी बार है जब किसी अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर रोक लगाई है। इससे पहले न्यू हैम्पशायर और कैलिफोर्निया की अदालतें भी इसे असंवैधानिक ठहरा चुकी हैं। सोरोकिन ने स्पष्ट कहा कि यह आदेश अमेरिका के संविधान के 14वें संशोधन का उल्लंघन करता है और इसे कार्यान्वित नहीं किया जा सकता।
राज्यों ने जताई राहत, व्हाइट हाउस करेगा अपील
न्यू जर्सी के अटॉर्नी जनरल मैथ्यू प्लैटकिन, जो इस मुकदमे में प्रमुख वादी थे, ने कहा, “मैं खुश हूं कि एक बार फिर अदालत ने राष्ट्रपति ट्रंप के असंवैधानिक आदेश को देशभर में लागू होने से रोक दिया। अमेरिका में जन्मा हर बच्चा अमेरिकी है — यह नियम कल भी था, आज भी है और कल भी रहेगा। कोई राष्ट्रपति इसे कलम के एक झटके से नहीं बदल सकता।”
हालांकि, व्हाइट हाउस की प्रवक्ता अबीगैल जैकसन ने कहा कि प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील करेगा और उन्हें भरोसा है कि उच्च न्यायालय में वे विजयी होंगे।
अदालत की सख्त टिप्पणी
जज सोरोकिन ने प्रशासन की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि आदेश पर रोक सिर्फ उन्हीं राज्यों तक सीमित होनी चाहिए जिन्हें वित्तीय नुकसान हो सकता है।
सोरोकिन ने कहा, “प्रशासन यह स्पष्ट करने में पूरी तरह असफल रहा है कि सीमित दायरे वाली रोक व्यवहारिक रूप से कैसे लागू होगी। उन्होंने यह भी नहीं बताया कि इससे राज्यों पर क्या प्रशासनिक या आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका यह रुख तर्क और कानून दोनों के खिलाफ है।”
अदालतों में बन रही है एकजुट राय
न्यू हैम्पशायर के जज जोसेफ ला प्लांटे ने हाल ही में एक नए क्लास-एक्शन मुकदमे में ट्रंप के आदेश पर रोक लगाई थी। वहीं, सैन फ्रांसिस्को स्थित अपीलीय अदालत ने भी इस आदेश को असंवैधानिक करार देते हुए रोक को बरकरार रखा। मैरीलैंड की एक अदालत ने भी संकेत दिया है कि यदि उच्च न्यायालय की मंजूरी मिलती है तो वह भी आदेश पर रोक लगाएगी।
संविधान का मूल सिद्धांत बना विवाद का केंद्र
इन सभी मुकदमों के केंद्र में संविधान का 14वां संशोधन है, जो 1868 में दासता समाप्त होने के बाद लागू हुआ था। यह संशोधन अमेरिका में जन्मे किसी भी व्यक्ति को नागरिकता का अधिकार देता है, चाहे उसके माता-पिता की कानूनी स्थिति कुछ भी हो।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि जो लोग अमेरिका में अवैध या अस्थायी रूप से रह रहे हैं, उनके बच्चे अमेरिका के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते और इसलिए उन्हें नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए।
हालांकि, अदालतों का मानना है कि यह तर्क संविधान की मूल भावना और ऐतिहासिक संदर्भ के खिलाफ है।
अब यह मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंचने की तैयारी में है, जहां अमेरिका के भविष्य के नागरिकता अधिकारों पर अंतिम फैसला होगा। तब तक ट्रंप का यह आदेश लागू नहीं हो सकेगा।













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