डेस्क:यूरोपीय संघ (EU) ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए एक नया रणनीतिक एजेंडा प्रस्तावित किया है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि यूरोप पहले से ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और हम इस वर्ष के अंत तक अपने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यूरोप व्यापार के लिए खुला है। हम भारत के साथ अपने साझा भविष्य में निवेश करने के लिए तैयार हैं।
उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने और क्या कहा
इस अवसर पर उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि अब समय आ गया है कि विश्वसनीय साझेदारों पर ध्यान केंद्रित किया जाए और साझा हितों तथा समान मूल्यों से प्रेरित साझेदारियों को दोगुना किया जाए। अपनी नई ईयू-भारत रणनीति के साथ, हम अपने संबंधों को अगले स्तर तक ले जा रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि 2024-2029 के लिए अपने राजनीतिक दिशानिर्देशों में घोषित इस पहल का उद्देश्य द्विपक्षीय सहयोग को गहरा, व्यापक और बेहतर ढंग से समन्वित करना है, जिससे दोनों भागीदारों के लिए समृद्धि और सुरक्षा बढ़े तथा प्रमुख वैश्विक चुनौतियों से निपटने में मदद मिले।
रक्षा क्षेत्र में हम अपने औद्योगिक सहयोग को और गहरा कर रहे हैं। यूरोप पहले से ही भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और हम वर्ष के अंत तक अपने मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यूरोप व्यापार के लिए खुला है। और हम भारत के साथ अपने साझा भविष्य में निवेश करने के लिए तैयार हैं।
इन एजेंडों पर रहेगा फोकस
- समृद्धि और स्थिरता: इसके तहत व्यापार और निवेश को बढ़ावा देना तथा 2025 के अंत तक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देना शामिल है।
- तकनीक और नवाचार: इसमें एआई, सेमीकंडक्टर, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष तकनीक जैसी महत्वपूर्ण उभरती प्रौद्योगिकियों पर सहयोग पर जोर दिया गया है।
- सुरक्षा: इसमें क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहन सहभागिता और रक्षा औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देना शामिल है, ताकि उत्पादन क्षमताओं, नवाचार और सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत किया जा सके।
- कनेक्टिविटी: योजना का उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र सुधार, विश्व व्यापार संगठन के आधुनिकीकरण, जलवायु कार्रवाई, मानवाधिकार और सुरक्षा पर समन्वित बहुपक्षीय भागीदारी के माध्यम से वैश्विक शासन को मजबूत करना है।
- सहयोग को सक्षम बनाना: इसमें डिजिटल क्षेत्र सहित कौशल गतिशीलता का विस्तार, शैक्षिक आदान-प्रदान, सांस्कृतिक कूटनीति और शैक्षिक सहयोग के माध्यम से आपसी समझ को बढ़ावा देना, साथ ही ईयू-भारत व्यापार मंचों के साथ व्यापारिक समुदायों को जोड़ना शामिल है।













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