बीकानेर : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को सीमा सुरक्षा बल में महिला और पुरुषों के लिए समान अवसर आधारित (जेंडर न्यूट्रल) नीति की सराहना करते हुए कहा कि सीमाओं की सुरक्षा में महिलाओं का योगदान कई मामलों में पुरुषों से भी अधिक रहा है।
अमित शाह ने राजस्थान के बीकानेर स्थित संछू सीमा चौकी पर सीमा सुरक्षा बल की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस दौरान उन्होंने बल के जवानों से संवाद किया तथा महिला कर्मियों के लिए नए बैरकों का भी उद्घाटन किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “जब हमने महिलाओं को सभी क्षेत्रों में समान अवसर देने और उन्हें सीमाओं पर तैनाती का निर्णय लिया, तब यह प्रश्न उठाया गया था कि सीमाओं पर महिलाओं की क्या भूमिका होगी और उन्हें क्या लाभ मिलेगा। लेकिन आज यह स्पष्ट है कि सीमाओं की सुरक्षा में महिलाओं का योगदान उल्लेखनीय रहा है। वर्ष २०३० तक सभी सुविधाएँ उन्हें पूरी तरह उपलब्ध कराई जाएँगी।”
उन्होंने बताया कि राजस्थान में महिला कर्मियों के लिए स्वीकृत ७९ बैरकों में से ६६ का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य प्रगति पर है।
उन्होंने आगे कहा कि लगभग दो सौ करोड़ रुपये की लागत से सीमावर्ती क्षेत्रों में सीमा सुरक्षा बल के अंतर्गत ३६० बैरकों का निर्माण किया जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद महिला जवान अधिक बेहतर और सुविधाजनक वातावरण में अपनी ड्यूटी निभा सकेंगी।
गृह मंत्रालय के अनुसार जनवरी २०१६ में केंद्र सरकार ने सीमा सुरक्षा बल सहित अन्य सीमा सुरक्षा बलों में कांस्टेबल स्तर पर १४ से १५ प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया था। दिसंबर २०२५ में राज्यसभा में दिए गए उत्तर के अनुसार वित्त वर्ष २०२४-२५ में १६८० महिला कर्मियों की भर्ती की गई।
इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बीकानेर के सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी मौजूद रहे।
इस बैठक में गृह मंत्रालय, राजस्थान सरकार, सीमा सुरक्षा बल के वरिष्ठ अधिकारी तथा सीमावर्ती पाँच जिलों के जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक शामिल हुए।













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