जयपुर : धनतेरस का पर्व केवल धन-संपत्ति और खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, संयम और सदाचार को जीवन में अपनाने का भी अवसर है। जीवन में स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन और संयम सबसे बड़ा धर्म है। वास्तविक समृद्धि भौतिक संपन्नता में नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, निर्मल मन और सदाचारी जीवन में निहित है। यह विचार शुक्रवार को मालवीय नगर स्थित अणुविभा केंद्र में आयोजित विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम में मुनिश्री तत्त्वरुचि जी ‘तरुण’ ने व्यक्त किए।
‘धनतेरस का आध्यात्मिक महत्त्व’ विषय पर संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि धनतेरस का वास्तविक संदेश केवल धन अर्जित करना नहीं, बल्कि जीवन को संयम और स्वास्थ्य से समृद्ध बनाना है। पर्व का महत्त्व खरीदारी से अधिक ईमानदारी, नैतिकता और जीवन मूल्यों में है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ तन, निर्मल मन और संयमित आचरण ही मनुष्य की वास्तविक संपत्ति है।
मुनिश्री ने समुद्र मंथन के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार अमृत प्राप्त करने के लिए समुद्र मंथन आवश्यक था, उसी प्रकार जीवन में श्रेष्ठता और आत्मिक आनंद प्राप्त करने के लिए स्वयं का मंथन भी जरूरी है। सकारात्मक सोच, विवेक, शुद्ध जीवनशैली और संयम साधना के माध्यम से हम अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं। त्योहारों का वास्तविक आनंद भी तभी है, जब उनके संदेश को जीवन में उतारा जाए।
नैतिकता और प्रामाणिकता से ही सार्थक है धनार्जन
इस अवसर पर मुनिश्री संभव कुमार जी ने भारतीय संस्कृति में वर्णित चार पुरुषार्थों- धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन के संचालन के लिए धन आवश्यक है, लेकिन उसका अर्जन नैतिकता और प्रामाणिकता के साथ होना चाहिए। किसी पर्व की पवित्रता वस्तुओं के मूल्य से नहीं, बल्कि जीवन में अपनाए जाने वाले मूल्यों से निर्धारित होती है।
उन्होंने कहा कि सच्ची समृद्धि केवल भौतिक सुविधाओं से प्राप्त नहीं होती। इसके लिए आर्थिक अनुशासन, धार्मिकता और नैतिक जीवनशैली भी आवश्यक है। जीवन की खुशियां केवल धन पर निर्भर नहीं करतीं, बल्कि शरीर की स्वस्थता, मन की निर्मलता और भावों की पवित्रता से ही जीवन में वास्तविक आनंद आता है।
मंगलमय वातावरण में हुआ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर पद्मप्रभु की पवित्र स्तुति के साथ हुआ। इस अवसर पर उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं ने जीवन को सार्थक, संयमित और सदाचारपूर्ण बनाने के शुभ संकल्प धारण किए। आध्यात्मिक प्रवचनों और मंगलमय वातावरण के बीच मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।













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