नई दिल्ली : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत–जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का “वृहत्तर प्रभाव, महत्व और असर” है, जो न केवल दोनों देशों बल्कि पूरे क्षेत्र और वैश्विक परिदृश्य को प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध पारंपरिक कूटनीति से आगे बढ़कर अब व्यापक रणनीतिक आयाम ले चुके हैं।
जापान के विदेश मंत्री मोतेगी तोशिमित्सु के साथ बैठक की शुरुआत में अपने संबोधन में जयशंकर ने कहा कि यह साझेदारी इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के संबंधों का दायरा काफी व्यापक हो चुका है।
उन्होंने कहा, “भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी है, जो यह दर्शाती है कि हमारे संबंधों का प्रभाव बड़ा है, महत्व बड़ा है और असर भी व्यापक है। इसका एक उदाहरण कल होने वाली क्वाड बैठक है, जिसमें हम मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।”
विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक 26 मई को भारत की अध्यक्षता में आयोजित की जाएगी, जिसमें भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री शामिल होंगे। इस बैठक की अध्यक्षता एस जयशंकर करेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत और जापान, दोनों ऊर्जा आयात पर निर्भर और बड़े व्यापारिक देश हैं, इसलिए समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता दोनों के लिए समान रूप से संवेदनशील हैं। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति और रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य में उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख किया।
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में आर्थिक सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय बन गई है, जिस पर दोनों देशों के बीच विस्तार से चर्चा आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दोनों देश न केवल ऊर्जा आयातक हैं, बल्कि बड़े व्यापारिक हितों और समुद्री हितों से भी जुड़े हुए हैं।
भारत और जापान के संबंधों को वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे द्वारा विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी का दर्जा दिया गया था, जिसे दोनों देशों के बीच नए युग की शुरुआत के रूप में देखा गया था।
विदेश मंत्री ने हाल के उच्च स्तरीय संपर्कों का भी उल्लेख किया और कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार राजनयिक संवाद और यात्राएं जारी हैं। उन्होंने कहा कि इस बार की बैठक दोनों देशों के सहयोग को और मजबूत करने का अवसर है।
यह बैठक आगामी क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले हो रही है, जिसमें भारत–जापान सहयोग के साथ-साथ मुक्त और खुले इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर साझा रणनीति पर चर्चा होने की उम्मीद है।













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