डेस्क : आम आदमी पार्टी (आप) से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में हुए कथित दल-बदल को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या दल-बदल करने वाले सांसदों की सदस्यता पर कोई असर पड़ेगा या उन्हें अपनी सीटें गंवानी पड़ सकती हैं।
इसी मुद्दे को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप के वरिष्ठ नेता राघव चड्ढा के पुराने बयानों को फिर से राजनीतिक बहस में शामिल किया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह दल-बदल लोकतांत्रिक जनादेश के खिलाफ है और इससे मतदाताओं के विश्वास का हनन होता है।
वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि सांसदों का यह कदम संविधान और कानूनी प्रावधानों के दायरे में आता है, और इसे राजनीतिक पुनर्संरचना के रूप में देखा जाना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, राघव चड्ढा के पहले दिए गए एक बयान को भी इस विवाद में उद्धृत किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने पार्टी लाइन से अलग जाने वाले नेताओं की आलोचना की थी। अब वही बयान दोनों पक्षों की ओर से अपने-अपने तर्कों को मजबूत करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस पूरे मामले ने पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।













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