डेस्क : पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर स्थिति को सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है। एक टेलीविजन साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के पास भारत की तरह कोई रणनीतिक तेल भंडारण व्यवस्था मौजूद नहीं है, जिसके कारण देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है।
मंत्री के अनुसार पाकिस्तान केवल सीमित वाणिज्यिक भंडार पर निर्भर है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में लंबे समय तक देश की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम नहीं है। उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान स्थिति में देश के पास बहुत कम दिनों के लिए ही कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का सुरक्षित भंडार उपलब्ध है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा का सीधा प्रभाव पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। उनके अनुसार यह स्थिति देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती है।
भारत के संदर्भ में टिप्पणी करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने रणनीतिक तेल भंडारण की दिशा में अपेक्षाकृत मजबूत व्यवस्था विकसित की है, जिससे वह आपूर्ति संकट की स्थितियों में अधिक स्थिर रह सकता है। वहीं पाकिस्तान इस प्रकार की दीर्घकालिक तैयारी से अभी भी पीछे है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। इसकी कमी न केवल आर्थिक अस्थिरता को बढ़ाती है, बल्कि आपूर्ति संकट के समय जनता पर भी सीधा प्रभाव डालती है।
पाकिस्तान के इस स्वीकारोक्ति को वहां की ऊर्जा नीति की गंभीर कमजोरियों के रूप में देखा जा रहा है, जिस पर तत्काल सुधारात्मक कदमों की आवश्यकता बताई जा रही है।













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