हैदराबाद : रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि भारत का महत्वाकांक्षी ‘मिशन सुदर्शन चक्र’ देश की सुरक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई प्रदान करेगा और यह आधुनिक भारत की बहु-स्तरीय वायु एवं मिसाइल रक्षा प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने इसे भारत के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि बदलते युद्ध स्वरूप में लचीलापन (रेजिलिएंस) और प्रतिरोधक क्षमता (डिटरेंस) राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
राजनाथ सिंह ने यह बात हैदराबाद स्थित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल) में स्थापित एडवांस्ड वेपन सिस्टम कॉम्प्लेक्स के उद्घाटन के अवसर पर कही। उन्होंने डीआरडीओ के मिसाइल सिस्टम्स एवं स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स क्लस्टर की सराहना करते हुए कहा कि संगठन ने भारत की तकनीकी उत्कृष्टता, सामरिक आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन ने भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास तंत्र की बढ़ती क्षमता को प्रमाणित किया है। उन्होंने कहा कि आकाश और ब्रह्मोस जैसी स्वदेशी प्रणालियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि भारत वैश्विक रक्षा प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि मिशन सुदर्शन चक्र आधुनिक भारत की बहु-स्तरीय मिसाइल रक्षा प्रणाली होगा, जो देश की महत्वपूर्ण सामरिक परिसंपत्तियों, सैन्य प्रतिष्ठानों और संवेदनशील अवसंरचना को विभिन्न प्रकार के हवाई खतरों से सुरक्षा प्रदान करेगा। यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के रक्षा दृष्टिकोण को और अधिक सशक्त बनाएगी।
राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों से वर्तमान सुरक्षा चुनौतियों का समाधान विकसित करने के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों पर भी ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, हाइपरसोनिक हथियार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और स्वायत्त प्लेटफॉर्म भविष्य के युद्धों की दिशा तय करेंगे और भारत को इन क्षेत्रों में अग्रणी बनने की आवश्यकता है।
उद्घाटन समारोह के दौरान रक्षा मंत्री ने अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों, उन्नत हथियार प्रणालियों और स्वदेशी मिसाइल प्लेटफॉर्मों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।













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