डेस्क:पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच में बढ़ती दरार का एक नया रूप देखने को मिला है। प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ भाजपा नेता दिलीप घोष ने गुरुवार को कहा कि वह प्रधानमंत्री मोदी की दुर्गापुर में होने वाली जनसभा में शामिल नहीं होंगे। इसका कारण पूछे जाने पर घोष ने कहा कि उन्हें रैली के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री की दुर्गापुर रैली 2026 के विधानसभा चुनाव के पहले बंगाल में एक प्रमुख राजनीतिक कार्यक्रम माना जा रहा है। इसमें पार्टी के शीर्ष नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है।
एक समय पर बंगाल में भाजपा के आक्रामक अभियान का हिस्सा रहे घोष को अहम राजनीतिक कार्यक्रम से बाहर रखने के पार्टी के फैसले से राज्य इकाई में पनप रही गुटबाजी एक बार फिर से सामने आ गई है। एजेंसी से बात करते हुए घोष ने कहा, “मैं (रैली में) नहीं जा रहा हूं क्योंकि मुझे आमंत्रित नहीं किया गया है। मेरी समझ से निमंत्रण जोन के अनुसार भेजे गए हैं। इसलिए मुझे विश्वास है कि जब मोदीजी कोलकाता जोन में आएंगे तो मुझे आमंत्रित किया जाएगा।’’
इस मुद्दे पर जब राज्य भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी से संपर्क किया गया तो उन्होंने पुष्टि की कि घोष का नाम अतिथि सूची में नहीं था। पहचान गुप्त रखते हुए भाजपा पदाधिकारी ने कहा, ‘‘केवल दुर्गापुर-बर्धमान क्षेत्र के नेताओं को आमंत्रित किया गया था। कोलकाता क्षेत्र में रैली होने पर उन्हें आमंत्रित किया जाएगा। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा को भी इस बार आमंत्रित नहीं किया गया है।’’
राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम के पहले राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेता का इस तरह से खुलकर बयान देना पार्टी में संवाद की कमी को प्रदर्शित कर रहा है। घोष की अनुपस्थिति को महज एक तकनीकी चूक से कहीं अधिक माना जा सकता है।
पार्टी सूत्रों ने स्वीकार किया कि घोष और नए प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के बीच हाल ही में सार्वजनिक रूप से एकता दिखाने के बावजूद, बंगाल भाजपा के उच्च स्तर पर सब कुछ ठीक नहीं है। पिछले सप्ताह भट्टाचार्य ने पार्टी के साल्ट लेक कार्यालय में घोष के साथ एक बैठक करके एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहल की थी। हालांकि घोष ने भाजपा छोड़ने की किसी भी योजना से बार-बार इनकार किया है, लेकिन राजनीतिक अटकलों पर उनकी अब वायरल हो चुकी ‘‘जोल नेई, पोनाओ नेई (पानी नहीं, मछली नहीं)’’ टिप्पणी सहित सवालों पर उनकी व्यंग्यात्मक प्रतिक्रियाओं ने संशय को मजबूत किया है।













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