डेस्क : भारत सरकार ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले भारतीय जहाजों पर किसी प्रकार का शुल्क (टोल) लगाने को लेकर ईरान के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है। विदेश मंत्रालय ने इस तरह की सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने दिल्ली में आयोजित मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि टोल लगाए जाने से संबंधित किसी भी समझौते या चर्चा की खबरें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार इस विषय पर ईरान के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत में शामिल नहीं है।
यह स्पष्टीकरण उस समय आया है जब ईरानी सरकारी मीडिया में हाल ही में ऐसी रिपोर्टें सामने आई थीं, जिनमें दावा किया गया था कि ईरान की संसद की एक समिति ने इस रणनीतिक जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रस्तावित योजना में ईरान की संप्रभुता को मजबूत करने के उद्देश्य से ‘रियाल-आधारित टोल प्रणाली’ और नई वित्तीय व्यवस्था शामिल हो सकती है। इसके साथ ही ओमान के साथ संभावित समन्वय, तथा अमेरिका और इज़राइल से जुड़े प्रतिबंधों का भी उल्लेख किया गया है।
हालांकि, भारत सरकार ने इन दावों से खुद को अलग रखते हुए कहा कि वह अपने जहाजरानी हितों की सुरक्षा के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है। प्रवक्ता ने बताया कि भारत, ईरान और क्षेत्र के अन्य देशों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित कर रहा है कि एलपीजी, एलएनजी और अन्य आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले भारतीय जहाजों का आवागमन सुरक्षित और निर्बाध बना रहे।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल के दिनों में छह भारतीय जहाज सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं, जो क्षेत्र में स्थिरता और समन्वय का संकेत है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, ब्रिटेन ने होर्मुज की वर्तमान स्थिति पर चर्चा के लिए भारत सहित कई देशों को आमंत्रित किया है। इस बैठक में भारत के विदेश सचिव भी भाग लेंगे, जहां क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श होने की संभावना है।













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