नई दिल्ली: भारत का सर्वोच्च न्यायालय ने कर्नाटक की श्रींगेरी विधानसभा सीट से कांग्रेस नेता टी.डी. राजेगौड़ा के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए उनकी 2023 की चुनावी जीत को बहाल कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि लोकतंत्र की मूल भावना को किसी भी स्थिति में “अपहृत” नहीं होने दिया जा सकता।
यह मामला 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव से जुड़ा है, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उम्मीदवार टी.डी. राजेगौड़ा को विजयी घोषित किया गया था। हालांकि, चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ने मतगणना प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया था।
उच्च न्यायालय के आदेश से शुरू हुआ विवाद
इस विवाद के बाद कर्नाटक उच्च न्यायालय ने पुनर्गणना (री-काउंटिंग) का आदेश दिया था। पुनर्गणना के परिणामस्वरूप भाजपा उम्मीदवार को विजेता घोषित कर दिया गया, जिसके चलते मूल परिणाम बदल गया और कांग्रेस प्रत्याशी की जीत रद्द हो गई।
इसके खिलाफ टी.डी. राजेगौड़ा ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय
सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता के निर्णय का सम्मान सर्वोपरि है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि केवल तकनीकी आधार पर किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि को पद से हटाना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के विपरीत है।
सुप्रीम कोर्ट ने उच्च न्यायालय के पुनर्गणना संबंधी आदेश को खारिज करते हुए मूल चुनाव परिणाम को बहाल कर दिया और टी.डी. राजेगौड़ा को विधायक के रूप में मान्यता दी।
राजनीतिक हलचल
इस फैसले के बाद कर्नाटक की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र और न्याय की जीत बताया है, जबकि भाजपा की ओर से फैसले पर प्रतिक्रिया में सावधानी बरती जा रही है।













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