नई दिल्ली: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) एसवाई कुरैशी के उस बयान के बाद सियासी बहस तेज हो गई है, जिसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के चुनाव आयोग के प्रति सम्मान का जिक्र किया था। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला और आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार चुनाव आयोग को राजनीतिक वर्चस्व स्थापित करने के साधन के रूप में देखती है।
जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह चुनाव आयोग को लोकतंत्र की आत्मा मानते थे, जबकि मौजूदा प्रधानमंत्री के कार्यकाल में चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चुनाव आयोग पर “कब्जा” कर लिया गया है और एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं को मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिश की गई।
रमेश ने कहा, “डॉ. मनमोहन सिंह ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था इतनी कमजोर कर दी जाएगी कि उसके प्रमुख राजनीतिक पक्षधरता के आरोपों से घिर जाएंगे।”
कांग्रेस नेता ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह का व्यक्तित्व और विचारधारा कभी भी देश की संस्थाओं को राजनीतिक रंग देने की अनुमति नहीं देती थी। उन्होंने कहा कि इतिहास पूर्व प्रधानमंत्री के लोकतंत्र के प्रति समर्पण और राष्ट्र निर्माण में योगदान को हमेशा याद रखेगा।
एसवाई कुरैशी ने सुनाया 2012 का किस्सा
दरअसल, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने एक इंटरव्यू में डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ा एक पुराना घटनाक्रम साझा किया था। उन्होंने बताया कि 2012 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान चुनाव आयोग ने तत्कालीन केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद के एक बयान को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन माना था।
कुरैशी के मुताबिक, चुनाव आयोग की कार्रवाई के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं और मंत्रियों ने आयोग की आलोचना की थी। उन्होंने इसकी जानकारी तत्कालीन प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार हरिश खरे को दी थी।
कुरैशी ने बताया कि इसके बाद अगले दिन डॉ. मनमोहन सिंह ने उनसे मुलाकात की और चुनाव आयोग के खिलाफ हो रही टिप्पणियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि डॉ. सिंह चुनाव आयोग की प्रतिष्ठा को लेकर बेहद संवेदनशील थे और संस्था पर किसी भी तरह का आरोप उन्हें स्वीकार नहीं था।
सलमान खुर्शीद के बयान पर हुआ था विवाद
यह मामला 2012 के उत्तर प्रदेश चुनाव से जुड़ा था, जब तत्कालीन कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने अपनी पत्नी और कांग्रेस उम्मीदवार लुईस खुर्शीद के प्रचार के दौरान पिछड़े मुसलमानों के लिए 9 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी।
चुनाव आयोग ने उनके बयान को आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए उन्हें फटकार लगाई थी। बाद में सलमान खुर्शीद ने अपने बयान पर खेद जताते हुए चुनाव आयोग के फैसले का सम्मान किया था।
अब एसवाई कुरैशी के इस पुराने घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार पर चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।













देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत