नई दिल्ली : भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को कहा कि न्यायपालिका की असली ताकत न्यायाधीशों (Bench) और वकीलों (Bar) के बीच मजबूत साझेदारी में निहित है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट आम नागरिकों को सुलभ, किफायती और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रतिबद्ध है।
जस्टिस सूर्यकांत यह बात संविधान क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के सम्मान समारोह में बोल रहे थे। समारोह में सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में नियुक्त हुए न्यायाधीशों जस्टिस शील नागू, जस्टिस श्री चंद्रशेखर, जस्टिस संजीव सचदेवा, जस्टिस अरुण पल्ली और जस्टिस वी. मोहना का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश जस्टिस पंकज मिथल को भी सम्मानित किया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति एक विस्तृत और गहन प्रक्रिया के तहत की जाती है। कॉलेजियम न्यायिक योग्यता, ईमानदारी, अनुभव और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को ध्यान में रखते हुए नामों पर विचार करता है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में देश की विविधता को बनाए रखने के लिए अलग-अलग हाईकोर्ट और क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त होने वाले प्रत्येक न्यायाधीश को कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। उन्होंने विश्वास जताया कि नवनियुक्त न्यायाधीश न्याय व्यवस्था को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
जस्टिस सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट बार की भी सराहना करते हुए कहा कि यह देश के सबसे प्रतिष्ठित कानूनी समुदायों में से एक है। उन्होंने कहा कि न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं के बीच सकारात्मक संवाद न्याय प्रणाली को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाता है।
समारोह में ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. आदिश सी. अग्रवाल ने मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की न्यायिक यात्रा को प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि जिला न्यायपालिका से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचने का उनका सफर मेहनत, अनुशासन और योग्यता का उदाहरण है।
अग्रवाल ने कहा कि जस्टिस सूर्यकांत की सरलता और युवा वकीलों को प्रोत्साहित करने की भावना ने Bench और Bar के रिश्तों को मजबूत किया है। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस पंकज मिथल के योगदान की भी सराहना की और कहा कि उनके फैसले संवैधानिक मूल्यों, निष्पक्षता और स्वतंत्र सोच को दर्शाते हैं।
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने न्याय व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर जोर देते हुए हाईकोर्ट न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष और सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की आयु 65 से बढ़ाकर 70 वर्ष करने की मांग की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या बढ़ाने की भी पैरवी की।
विल्सन ने अदालतों में अनुशासन और गरिमा बनाए रखने के लिए संस्थागत सुरक्षा उपायों की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की प्रतिष्ठा और पवित्रता बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस पंकज मिथल ने कहा कि न्यायाधीश और वकील अलग-अलग भूमिकाओं में होते हुए भी संवैधानिक जिम्मेदारी साझा करते हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक अदालतों के कामकाज में बदलाव ला रही है, लेकिन ईमानदारी, निष्पक्षता और न्यायिक विवेक जैसे मूल्यों का स्थान कोई नहीं ले सकता।
नवनियुक्त न्यायाधीशों ने भी इस अवसर पर अपने विचार रखे। जस्टिस शील नागू ने बार के सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि न्याय प्रदान करने के मिशन में अधिवक्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। जस्टिस श्री चंद्रशेखर ने बार से बेंच तक की अपनी यात्रा को याद करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार ने उनके करियर को दिशा देने में अहम भूमिका निभाई।
जस्टिस संजीव सचदेवा ने सुप्रीम कोर्ट में नियुक्ति को “घर वापसी” जैसा अनुभव बताया। वहीं जस्टिस अरुण पल्ली ने कानूनी समुदाय से मिले सम्मान को अपने लिए बेहद भावुक क्षण बताया। जस्टिस वी. मोहना ने जिला अदालतों से सुप्रीम कोर्ट तक के अपने सफर को याद करते हुए बार और कॉलेजियम के विश्वास के लिए धन्यवाद दिया।
समारोह में न्यायपालिका और कानूनी समुदाय के बीच सहयोग, पारदर्शिता और न्याय तक आसान पहुंच को मजबूत करने के संकल्प को दोहराया गया।













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