डेस्क:पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस ले ली है। विपक्षी दलों एवं किसान संगठनों के बीच इस पॉलिसी को लेकर जबर्दस्त विरोध था। वैसे तो सरकार इस नीति का लगातार बचाव कर रही थी। लेकिन कुछ दिन पहले पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने इसके कार्यान्वयन पर चार सप्ताह के लिए अंतरिम रोक लगा दी थी। इस पॉलिसी के तहत भूस्वामी को एक एकड़ जमीन के बदले में 1,000 वर्ग गज का आवासीय भूखंड और पूर्ण विकसित भूमि पर 200 वर्ग गज का व्यावसायिक भूखंड दिए जाने का प्रावधान था।
हाई कोर्ट ने लगा दी थी रोक
सोमवार शाम को, आवास एवं शहरी विकास विभाग के प्रमुख सचिव ने एक बयान में कहा कि सरकार 14 मई की भूमि समेकन नीति और उसके बाद के संशोधनों को वापस लेती है। बयान में कहा गया कि अब जारी किए गए आशय पत्र, पंजीकरण या उसके तहत की गई कोई भी अन्य कार्रवाई अब से रद्द मानी जाएगी। हाई कोर्ट ने सात अगस्त को नीति पर अंतरिम रोक लगाते हुए कहा था कि ऐसा जान पड़ता है कि इसे जल्दबाजी में अधिसूचित किया गया है। कोर्ट ने कहा कि इसके सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभाव का पहले ही आकलन करके निराकरण कर लिया जाना चाहिए था।
विपक्ष ने बताया था लूट योजना
मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आप सरकार विपक्षी दलों और विभिन्न किसान संगठनों की आलोचना का सामना कर रही थी। इन सभी ने लैंड पूलिंग पॉलिसी को किसानों से उनकी जमीन छीनने के उद्देश्य से लाई गई एक लूट योजना करार दिया था। शिरोमणि अकाली दल (शिअद), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस एवं कई अन्य दलों ने इस नीति के खिलाफ प्रदर्शन किए थे। संयुक्त किसान मोर्चा समेत विभिन्न किसान संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी। नीति के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन हो रहे थे। इस नीति को बड़े रियल एस्टेट समूहों को लाभ पहुंचाने और किसानों का बर्बाद करने वाली नीति बताया जा रहा था। किसान संगठनों ने फैसले का स्वागत किया है और इसे अपनी एकजुटता की जीत बताया है। वे मांग कर रहे हैं कि सरकार भविष्य में ऐसी नीतियां बनाने से पहले ग्राम सभाओं और हितधारकों से व्यापक परामर्श करे
पंजाब सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी 2025 लुधियाना, मोहाली, अमृतसर, पटियाला, जालंधर, संगरूर और बठिंडा समेत 27 शहरों में लागू की थी। यह पॉलिसी जमीनों के अधिग्रहण की बजाय सरकारी प्रोजेक्ट में किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी पर आधारित है, जिसमें जमीन के मालिक अपनी जमीन को खुद अपनी मर्जी से पूल करते हैं और बदले में रेजिडेंशियल या कमर्शियल प्लॉट सरकार से हासिल करते हैं। पहले प्रति एकड़ 30000 रुपये सालाना मुआवजा मिलता था, जिसे संशोधन के बाद बढ़ाकर पहले 50000 रुपए किया गया था और अब 1 लाख रुपए कर दिया गया था। मुआवजे में हर साल 10 प्रतिशत की वृद्धि होने का प्रावधान भी था। प्रति एकड़ जमीन के बदले 1000 वर्ग गज का रेजिडेंशियल या 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट देने का प्रावधान पॉलिसी के तहत किया गया है। कुछ मामलों में दोनों प्लॉट भी मिल सकते हैं। लैंड पूलिंग पॉलिसी का मकसद 14000 से ज्यादा अवैध कॉलोनियों को रोकना और शहरीकरण को बढ़ावा देना था।
क्या कह रही थी सरकार
वहीं, आप ने राज्य सरकार की नीति के खिलाफ दुष्प्रचार करने को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा था। पार्टी नेताओं ने इसे किसान-हितैषी बताया था। राज्य सरकार ने आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने के लिए लुधियाना के कई गांवों समेत 164 गांवों में लगभग 65,000 एकड़ जमीन अधिगृहीत करने की योजना बनाई थी। सरकार ने लोगों को आश्वासन दिया था कि भूस्वामियों से एक गज भी जमीन जबरन नहीं ली जाएगी।













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