डेस्क : प्रमुख बलोच अधिकार कार्यकर्ता डॉ. महरंग बलोच ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कथित राज्य हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा कि वे अधिकार, न्याय और गरिमा की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे हैं।
एक्स (पूर्व ट्विटर) पर साझा किए गए अपने बयान में डॉ. बलोच ने सरकार द्वारा जॉइंट पब्लिक एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर लगाए गए प्रतिबंध की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीतिक स्वतंत्रताओं और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति को दबाने की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाता है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में मतभेदों का समाधान संवाद और राजनीतिक सहभागिता के माध्यम से किया जाता है, न कि प्रतिबंधों, गिरफ्तारियों और बल प्रयोग के जरिए।
डॉ. बलोच ने पीओजेके की स्थिति की तुलना बलोचिस्तान के हालात से करते हुए कहा कि पाकिस्तान के सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों को अपने अधिकार, पहचान और न्याय की मांग उठाने पर समान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण राजनीतिक आंदोलनों को अक्सर दबाव और दमनात्मक कार्रवाइयों के माध्यम से कुचलने का प्रयास किया जाता है।
उन्होंने कहा, “बलोचिस्तान और कश्मीर के बीच भौगोलिक दूरी भले ही बड़ी हो, लेकिन दर्द, घाव और न्याय की आकांक्षा समान है।” डॉ. बलोच ने कथित रूप से घायल प्रदर्शनकारियों, शोकाकुल परिवारों और दमन का सामना कर रहे लोगों के प्रति सहानुभूति व्यक्त की।
उन्होंने बलोच यकजेहती समिति (बीवाईसी) का उल्लेख करते हुए कहा कि कश्मीर की तरह ही उनके संगठन को भी राज्य के दबाव और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। उनके अनुसार, बलोचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, सिंध, पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान और पीओजेके जैसे क्षेत्रों में सार्वजनिक आंदोलनों का जवाब अक्सर संवाद के बजाय बल प्रयोग से दिया जाता है।
डॉ. बलोच ने यह भी आरोप लगाया कि सरकारें जन आंदोलनों को नजरअंदाज करने, कलंकित करने और दबाने का प्रयास करती हैं। हालांकि ऐसे कदम अस्थायी रूप से भय पैदा कर सकते हैं, लेकिन वे न्याय और जवाबदेही की मांगों को समाप्त नहीं कर सकते।
उन्होंने लापता व्यक्तियों के परिवारों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं और देशभर में हिंसा एवं असुरक्षा से प्रभावित समुदायों के प्रति भी एकजुटता व्यक्त की। डॉ. बलोच ने कहा कि उनका संघर्ष मानव गरिमा, समानता, लोकतांत्रिक अधिकारों और आत्मनिर्णय की मांगों पर आधारित है।













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