नई दिल्ली: 2026 के राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना है। इस बार 10 राज्यों की कुल 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, जिनमें से तीन राज्यों—बिहार, ओडिशा और हरियाणा—की 11 सीटों पर मतदान अनिवार्य है। बाकी सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या इतनी है कि उन्हें निर्विरोध जीत मिल सकती है।
ओडिशा में भाजपा की रणनीति
ओडिशा में भाजपा अपने पुराने सहयोगी बीजू जनता दल (बीजद) के साथ मिलकर विपक्षी दलों का समीकरण बिगाड़ने की तैयारी में है। भाजपा के पास अपने 79 विधायकों के समर्थन के साथ तीन निर्दलीय उम्मीदवारों का भी समर्थन है। इससे विपक्ष के लिए चौथी सीट पर जीत मुश्किल हो सकती है।
बिहार में मुकाबला कड़ा
बिहार में पांच सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं। एनडीए के पास स्पष्ट बहुमत है, जिससे भाजपा-जेडीयू उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं, विपक्षी दल राजद को जीत के लिए अन्य दलों के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ेगा।
हरियाणा में कांग्रेस की चुनौतियां
हरियाणा में दो सीटों की लड़ाई है। भाजपा के उम्मीदवार संजय भाटिया, कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और एक निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस के 37 विधायकों के बावजूद, क्रॉस वोटिंग और भाजपा की रणनीति इसे चुनौतीपूर्ण बना रही है।
राजनीतिक विश्लेषण
विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा इस चुनाव में विपक्ष के समीकरण को तोड़ने की कोशिश कर रही है। यह चुनाव राज्यसभा में दलों की स्थिति और संसद में सत्ता संतुलन पर भी असर डाल सकता है। ओडिशा और बिहार जैसे बड़े राज्यों के परिणाम इसे और महत्वपूर्ण बनाते हैं।
मतदान की प्रक्रिया और तारीख
राज्यसभा चुनाव में विधायकों द्वारा मतदान 16 मार्च 2026 को होगा। परिणाम के बाद संसद में विभिन्न दलों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।













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