फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रंगभरी या आमलकी एकादशी कहा जाता है। यह तिथि अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी गई है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ भगवान शिव की उपासना का भी विशेष विधान है। विरले ही ऐसे अवसर आते हैं जब श्रीहरि और महादेव—दोनों की एक साथ आराधना का सौभाग्य प्राप्त होता है।
रंगभरी एकादशी का विशेष संबंध काशी की प्राचीन परंपरा से जुड़ा है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव गौना कराकर माता पार्वती को पहली बार अपनी नगरी काशी लाए थे। वहां भक्तों ने गुलाल अर्पित कर उनका अभिनंदन किया। तभी से काशी में यह पर्व भक्ति और उल्लास के रंगों के साथ मनाया जाता है।
इस वर्ष रंगभरी एकादशी आज 27 फरवरी, शुक्रवार को मनाई जा रही है। द्रिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल एकादशी तिथि 26 फरवरी को रात्रि 8 बजकर 03 मिनट पर प्रारंभ हुई और आज 27 फरवरी को सायं 6 बजकर 02 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार आज का व्रत श्रेष्ठ और पुण्यदायक माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि जिस एकादशी में द्वादशी का संयोग हो, वह विशेष फल प्रदान करती है, जबकि दशमी से युक्त एकादशी व्रत वर्जित माना गया है। इस दृष्टि से आज की एकादशी अत्यंत शुभ है।
पूजन विधि और आध्यात्मिक महत्व
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। एक पवित्र आसन बिछाकर शालिग्राम जी को शंख से स्नान कराएं। चंदन, तुलसी दल, पुष्प और फल अर्पित कर भगवान विष्णु का विधिपूर्वक पूजन करें।
आमलकी एकादशी के अवसर पर आंवला वृक्ष का पूजन विशेष फलदायी माना गया है। आंवले के वृक्ष के समीप दीप प्रज्वलित कर कथा श्रवण करने से श्रीहरि की कृपा प्राप्त होती है। भगवान विष्णु को खीर का भोग लगाएं और उसमें तुलसी पत्र अवश्य अर्पित करें। पीले पुष्पों की माला अर्पित करना भी शुभ माना गया है। कार्यक्षेत्र में उन्नति की कामना से आंवला वृक्ष की जड़ की मिट्टी से तिलक लगाने की परंपरा है।
इस दिन शिवलिंग पर लाल गुलाल अर्पित करें। माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री समर्पित कर पूजन करें। तुलसी माता को नारियल और चुनरी अर्पित कर आरती करें तथा तुलसी चालीसा का पाठ करें। मान्यता है कि ऐसा करने से दांपत्य जीवन में मधुरता और सौहार्द की वृद्धि होती है।
रंगभरी एकादशी केवल एक व्रत नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम और आध्यात्मिक समन्वय का पर्व है—जहां भक्ति के रंगों में रँगे श्रद्धालु शिव और विष्णु दोनों की कृपा एक साथ प्राप्त करते हैं।
इस पावन अवसर पर सभी भक्तों को मंगलमय शुभकामनाएं।













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