नई दिल्ली: मानसून सत्र के पहले हफ्ते में संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित होने को लेकर केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि संसद नहीं चलने से असल नुकसान विपक्ष का होता है, क्योंकि वह सरकार से जवाबदेही मांगने का महत्वपूर्ण अवसर खो देता है।
एक निजी कार्यक्रम में बोलते हुए रिजिजू ने कहा, “जब संसद नहीं चलती तो कई अधिकारी राहत महसूस करते हैं, क्योंकि उन्हें कठिन सवालों से छुटकारा मिल जाता है। लेकिन जब सदन सुचारू रूप से चलता है, तो मंत्रियों को सवालों का सामना करना पड़ता है। विपक्ष को लगता है कि वह सरकार को नुकसान पहुंचा रहा है, जबकि असल में वह लोकतंत्र में अपनी भूमिका को ही कमजोर कर रहा होता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि संसद की कार्यवाही स्थगित होने से केवल कुछ मिनटों की बहस होती है और कई बार जरूरी मुद्दे भी उठ नहीं पाते। “किसी भी लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही संसद के ज़रिये तय होती है। इसलिए सदन का चलना बेहद जरूरी है,” उन्होंने कहा।
विपक्ष को नहीं मानता दुश्मन
रिजिजू ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी विपक्षी सांसदों को दुश्मन के रूप में नहीं देखा। “हम सब सहयोगी हैं। 2014 से पहले मैं खुद विपक्ष में था। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता हो सकती है, लेकिन शत्रुता नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने भारतीय सांसदों की चुनौतियों पर भी ध्यान खींचा। उनके अनुसार, भारत में एक सांसद औसतन 20 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि विकसित देशों में यह संख्या महज़ 66 हजार के आसपास होती है। “हमारे सांसदों से केवल कानून बनाने की नहीं, बल्कि नालियों की मरम्मत से लेकर जेल से छुड़ाने तक की उम्मीद की जाती है,” उन्होंने कहा।
संसद में गतिरोध बरकरार
यह बयान ऐसे समय में आया है जब मानसून सत्र के पहले चार दिन विपक्ष के लगातार विरोध के कारण कामकाज ठप रहा है। विपक्ष ऑपरेशन सिंदूर, बिहार की मतदाता सूची में गड़बड़ी और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ से इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार पर हमला कर रहा है। सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के चलते संसद की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है।













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