नई दिल्ली:बुजुर्गों के भरण-पोषण से जुड़े लगभग 16 साल पुराने कानून में बदलाव की पिछले कई वर्षों से चल रही कसरत अब लगभग समाप्त होने वाली है। इससे जुड़े विधेयक को अब नए बदलावों के साथ संसद के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी है। इसमें बदलती परिस्थितियों को देखते हुए बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया गया है।
प्रत्येक जिले में बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस सेल
विधेयक में प्रत्येक जिले में बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस सेल और प्रत्येक पुलिस थाने में एक एएसआइ रैंक का नोडल आफिसर नियुक्त करने जैसी पहल शामिल है। हालांकि, इसके अमल का जिम्मा राज्यों पर होगा। राज्यों में पहले से ही पुलिस फोर्स की भारी कमी है।
संसदीय समिति के सुझावों के बाद इसमें किए गए कई बदलाव
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने संसदीय समिति की सिफारिश के बाद इस प्रस्तावित विधेयक में जो भी बड़े बदलाव किए हैं, उनमें प्रत्येक थाना क्षेत्र में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की एक सूची तैयार करने का भी विषय शामिल है।
बुजुर्गों के लिए हेल्पलाइन नंबर को 24 घंटे सक्रिय रखने का उठाया गया कदम
मौजूदा समय में घरों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की संपत्ति हड़पने जैसे मामलों को देखते हुए यह पहल की गई है। इसके साथ ही सभी राज्यों में बुजुर्गों की मदद से जुड़े हेल्पलाइन नंबर को 24 घंटे सक्रिय रखने जैसे कदम भी शामिल हैं। इसमें भरण-पोषण की राशि बच्चों की हैसियत के आधार पर तय करना शामिल है।
अब तक इसकी अधिकतम सीमा दस हजार रुपये ही है। इसके साथ ही कोई भी बुजुर्ग किस-किस से यह भत्ता लेने का हकदार होगा, इसका भी दायरा बढ़ाया गया है। माता-पिता व बुजुर्गों के भरणपोषण से जुड़ा मौजूदा कानून 2007 में तैयार किया गया था।













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