डेस्क : मध्य पूर्व में जारी युद्ध और बढ़ते तनाव के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर राहत भरी खबर सामने आई है। 80886 मीट्रिक टन कच्चे तेल से लदा भारतीय टैंकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित रूप से गुजरात के बंदरगाह पर पहुंच गया है। यह टैंकर दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य, को पार कर भारत तक पहुंचा। जग लाडकी सुजमैक्स क्लास का टैंकर है, जिसकी लंबाई 274.19 मीटर, चौड़ाई 50.04 मीटर, डेडवेट टनेज 164,716 टन और ग्रॉस टनेज लगभग 84,735 टन है। यह जहाज ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी का है।
80,886 मीट्रिक टन तेल के साथ भारत पहुंचा टैंकर
जग लाडकी अपने साथ 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर आया है, जो देश की घरेलू मांग को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा। युद्ध और समुद्री मार्गों पर बढ़ते खतरों के बीच यह तीसरा भारतीय टैंकर है जो सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंचा है। गुजरात के बंदरगाह पर लंगर डालने के बाद इस तेल को देश के विभिन्न हिस्सों में सप्लाई किया जाएगा।
चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में यात्रा
14 मार्च को टैंकर यूएई के फुजैराह पोर्ट में क्रूड लोड कर रहा था, तभी फुजैराह ऑयल टर्मिनल पर ड्रोन हमला हुआ, जिससे आग लग गई और ऑपरेशंस प्रभावित हुए। इसके बावजूद टैंकर और सभी नाविक सुरक्षित रहे। टैंकर ने 15 मार्च को सुबह 10:30 बजे IST सुरक्षित रूप से फुजैराह से रवाना किया।
भारतीय नौसेना ने किया एस्कॉर्ट
सूत्रों के अनुसार, भारतीय नौसेना का युद्धपोत खाड़ी के ओमान क्षेत्र में टैंकर के साथ रहा, ताकि उसकी यात्रा सुरक्षित हो सके। यह तीसरा भारतीय झंडे वाला जहाज है जो हाल के संघर्ष क्षेत्र से सुरक्षित निकला है। इससे पहले, MT शिवालिक और MT नंदा देवी नामक दो एलपीजी शिप्स ने 16 और 17 मार्च को भारत पहुंचकर लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी सप्लाई किया था।
होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ओमान और ईरान के बीच स्थित है, फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है और वैश्विक तेल-गैस व्यापार के लिए एक प्रमुख ‘चोकपॉइंट’ है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण यह मार्ग अस्थिर और संवेदनशील बन गया है। ऐसे में भारतीय टैंकर का सुरक्षित पार होना देश की मजबूत नेविगेशन और कूटनीतिक स्थिति को दर्शाता है।
ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता
इतनी बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति देश में घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगी। भारत मध्य पूर्व पर अपनी ऊर्जा जरूरतों (कच्चे तेल और एलपीजी) के लिए काफी हद तक निर्भर है और इन टैंकरों का सुरक्षित आगमन सरकार और तेल कंपनियों की रणनीतिक तैयारी का परिणाम है।













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