नई दिल्ली: देश में फिलहाल गेहूं के दाम बढ़ने का कोई संकट नहीं है। बीते कुछ दिनों में गेहूं के दाम तेजी से बढ़ने लगे थे और सरकार ने दाम काम करने के सभी उपाय करने शुरू कर दिए थे। कई बार सरकार ने खुले बाजार में गेहूं भी बेचा, ताकि गेहूं के बढ़ते रेट पर अंकुश लगाया जा सके।
सरकार ने गोदामों में रखा गेहूं बाजार में उतारा। इसका फायदा भी हुआ और कीमतें काबू में रहीं। हाल के दिनों में तापमान में तेज बढ़ोतरी के चलते इस बात की आशंका प्रबल होने लगी थी कि गेहूं के दाम एक बार फिर बढ़ सकते हैं। फरवरी के दूसरे हफ्ते से ही तापमान में तेज बढ़ोतरी महसूस की जाने लगी थी।
गेहूं की फसल पर संकट नहीं
तापमान के बढ़ने से मौसम विज्ञानियों ने आशंका जताई थी कि इससे गेहूं की फसल खराब हो सकती है। इस बीच एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें कहा जा रहा है कि गेंहू की फसल पर फिलहाल तापमान का असर नहीं होगा। IMD ने कहा है कि फिलहाल ऐसा तापमान नहीं है कि गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचे। इस साल मार्च का तापमान 10 सालों के औसत तापमान से कुछ अधिक रह सकता है, लेकिन वो इतना अधिक नहीं होगा कि गेहूं की फसल को गंभीर नुकसान हो।
क्या होगा फसल का चक्र
कृषि वैज्ञानिक रघुवर आचार्य बताते हैं कि 15 अप्रैल तक अमूमन हर जगह गेहूं की कटाई हो जाती है। अगर किसी ने गेहूं की बुवाई देर से की हो, तब भी गर्मी के अचानक बढ़ने से पहले ज्यादातर फसलों की कटाई हो जाएगी। पंजाब, हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान और यूपी जैसे राज्यों में गेहूं का अधिकतर रकबा 15 अप्रैल तक कट जाएगा।
गेहूं की नई किस्में सह सकती हैं तापमान
देश के ज्यादातर इलाकों में गेंहू की नई किस्म लगाई जाने लगी है। जेनेटिक इंजीनियरिंग के दम पर इन फसलों को मौसम के बदलावों को सहन करने लायक बनाया गया है। कृषि वैज्ञानिक रघुवर आचार्य बताते हैं कि जिन लोगों नई परंपरागत बीजों का इस्तेमाल करते हुए गेहूं की फसल लगाई है, उनके लिए इतना काफी होगा कि वे खेत की मिट्टी में नमी बरकरार रखें। जरूरत पड़े तो हल्की सिंचाई करें, लेकिन अधिक पानी फसलों को गिरा सकता है, क्योंकि इन दिनों हवा काफी तेज चलती है।













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