डेस्क:भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ‘यूपीआई लाइट’ का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को बड़ी राहत दी है। दरअसल, यूपीआई लाइट में वॉलेट की सीमा को बढ़ाकर 5,000 रुपये और प्रति लेनदेन की सीमा को 1,000 रुपये कर दिया गया है।
क्या है यूपीआई लाइट
यूपीआई लाइट के तहत होने वाले लेनदेन इस हद तक ऑफलाइन हैं कि उनमें ‘प्रमाणीकरण के अतिरिक्त कारक’ (एएफए) की जरूरत नहीं होती है। इसके अलावा लेनदेन से जुड़े अलर्ट भी वास्तविक समय में नहीं भेजे जाते हैं। ऑफलाइन भुगतान का मतलब ऐसे लेनदेन से है जिसके लिए मोबाइल फोन में इंटरनेट या दूरसंचार कनेक्टिविटी की जरूरत नहीं होती है।
क्या कहा आरबीआई ने
केंद्रीय रिजर्व बैंक ने एक सर्कुलर में कहा- यूपीआई लाइट के लिए बढ़ी हुई सीमा 1,000 रुपये प्रति लेनदेन होगी जिसमें किसी भी समय कुल सीमा 5,000 रुपये होगी। फिलहाल ऑफलाइन भुगतान में लेनदेन की ऊपरी सीमा 500 रुपये है। इसके साथ किसी भी समय भुगतान साधन पर ऑफलाइन लेनदेन की कुल सीमा 2,000 रुपये है। बता दें कि रिजर्व बैंक ने ऑफलाइन लेनदेन में छोटे मूल्य के डिजिटल भुगतानों को सुविधाजनक बनाने के लिए जनवरी, 2022 में जारी ‘ऑफलाइन ढांचे’ के प्रावधानों को संशोधित किया। केंद्रीय बैंक ने इस साल अक्टूबर में यूपीआई लाइट के आफलाइन भुगतान की सीमा बढ़ाने की घोषणा की थी।
यूपीआई ट्रांजैक्शन नवंबर में घटा
देश में यूपीआई के माध्यम से ट्रांजैक्शन नवंबर 2024 में संख्या और मूल्य के हिसाब से कम रहा, जिसे त्योहारों का प्रभाव बताया जा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या इस वर्ष अक्टूबर में 16.58 अरब के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गयी थी और इनका मूल्य 23.50 लाख करोड़ रुपये के बराबर था। इस वर्ष नवंबर में इनकी संख्या गिर कर 15.48 अरब रही और इनका मूल्य 21.55 लाख करोड़ रुपये रहा।













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