स्पोर्ट्स डेस्क : भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) ने एलीट नेशनल कोचिंग कैंप के लिए एक औपचारिक असेसमेंट फ्रेमवर्क लागू किया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रदर्शन आधारित बनाना है।
बीएफआई द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार खिलाड़ियों का मूल्यांकन दो चरणों में किया जाएगा। पहले चरण में स्ट्रेंथ एवं कंडीशनिंग टेस्ट होंगे, जबकि दूसरे चरण में मुक्केबाजों के बीच स्पैरिंग मुकाबले आयोजित किए जाएंगे। इन मुकाबलों के आधार पर प्रत्येक भार वर्ग में अंतिम रैंकिंग तय की जाएगी।
नए फ्रेमवर्क के तहत कुल 200 अंकों का मूल्यांकन सिस्टम निर्धारित किया गया है। इसमें तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों प्रकार के मानदंड शामिल किए गए हैं। गैर-तकनीकी मानकों में खिलाड़ियों की उपस्थिति, फिटनेस, वजन प्रबंधन, अनुशासन और अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन की क्षमता को आंका जाएगा, जबकि तकनीकी मूल्यांकन विशेषज्ञों के पैनल द्वारा किया जाएगा।
बीएफआई ने स्पष्ट किया है कि यह रैंकिंग आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं जैसे कॉमनवेल्थ गेम्स, एशियाई खेल और अन्य प्रमुख टूर्नामेंटों के लिए टीम चयन का आधार बनेगी। यह रैंकिंग अगली मूल्यांकन प्रक्रिया तक प्रभावी रहेगी।
नियमों के अनुसार, ओलंपिक भार वर्गों में शीर्ष चार और गैर-ओलंपिक वर्गों में शीर्ष दो मुक्केबाजों को ही नेशनल कोचिंग कैंप में आगे अवसर मिलेगा। साथ ही, अनुशासन और वजन नियंत्रण से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन अनिवार्य किया गया है, जिनके उल्लंघन पर अंक कटौती का प्रावधान रखा गया है।
बीएफआई के कार्यकारी निदेशक कर्नल अरुण मलिक ने कहा कि यह नई प्रणाली खिलाड़ियों के चयन में निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी और बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का समान अवसर प्रदान करेगी।













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