• Latest
  • Trending
  • All
  • बिजनेस
एक दिन मौन के साथ: रविवार की आध्यात्मिक साधना

एक दिन मौन के साथ: रविवार की आध्यात्मिक साधना

May 3, 2026
मंगोलिया में भारत का धमाका, प्रीति पवार और दीपक ने पहले राउंड में मारी बाज़ी

अब प्रदर्शन से तय होगी रैंकिंग, बीएफआई ने बनाया नया फ्रेमवर्क

May 3, 2026
“हमारी टीम में चैंपियन बनने की क्षमता”: हरमनप्रीत कौर का टी20 वर्ल्ड कप स्क्वाड पर भरोसा

“हमारी टीम में चैंपियन बनने की क्षमता”: हरमनप्रीत कौर का टी20 वर्ल्ड कप स्क्वाड पर भरोसा

May 3, 2026
सान्या मल्होत्रा की ‘पगलैट-2’ पर काम शुरू, नेटफ्लिक्स पर ही होगी रिलीज

सान्या मल्होत्रा की ‘पगलैट-2’ पर काम शुरू, नेटफ्लिक्स पर ही होगी रिलीज

May 3, 2026
ऊषा मंगेशकर को सताती है लता और आशा की याद, बोलीं—“अकेलापन अब जीवन का हिस्सा बन गया”

ऊषा मंगेशकर को सताती है लता और आशा की याद, बोलीं—“अकेलापन अब जीवन का हिस्सा बन गया”

May 3, 2026
एयर इंडिया एक्सप्रेस सेल: 16 जनवरी तक ऑफर

खाने को वैकल्पिक बनाने की तैयारी में एयर इंडिया, सस्ता हो सकता है हवाई टिकट

May 3, 2026
एलपीजी महंगी, चाय-समोसा भी होंगे महंगे; छोटे कारोबारियों पर बढ़ा दबाव

एलपीजी महंगी, चाय-समोसा भी होंगे महंगे; छोटे कारोबारियों पर बढ़ा दबाव

May 3, 2026
समर कैंप: बच्चों की ज़रूरत या केवल एक बाज़ार का आकर्षण?

समर कैंप: बच्चों की ज़रूरत या केवल एक बाज़ार का आकर्षण?

May 3, 2026
10 जनवरी 2026 : आज का राशिफल

आज का राशिफल – 3 मई 2026

May 3, 2026
एक मां, एक बच्चा और डूबता हुआ भरोसा

एक मां, एक बच्चा और डूबता हुआ भरोसा

May 2, 2026
धनबाद में कोल वाशरी हादसा: स्लरी में दबकर 4 मजदूरों की मौत, कई के फंसे होने की आशंका

धनबाद में कोल वाशरी हादसा: स्लरी में दबकर 4 मजदूरों की मौत, कई के फंसे होने की आशंका

May 2, 2026
मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’: आज को साधो, कल का भरोसा नहीं

मुनि श्री तत्त्व रुचि जी ‘तरुण’: आज को साधो, कल का भरोसा नहीं

May 2, 2026
2026 बंगाल चुनाव: भबानीपुर में ममता बनर्जी vs सुवेंदु अधिकारी

बंगाल के फाल्टा में डर का माहौल: टीएमसी पर घर जलाने की धमकी का आरोप

May 2, 2026
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Sunday, May 3, 2026
  • Login
ON THE DOT
  • मुख्य समाचार
  • देश
    • राज्य-शहर
  • विदेश
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • जीवंत
  • ENGLISH
No Result
View All Result
ON THE DOT
  • मुख्य समाचार
  • देश
    • राज्य-शहर
  • विदेश
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • जीवंत
  • ENGLISH
No Result
View All Result
ON THE DOT
No Result
View All Result
Home आराधना-साधना

एक दिन मौन के साथ: रविवार की आध्यात्मिक साधना

ON THE DOT TEAM by ON THE DOT TEAM
May 3, 2026
in आराधना-साधना
Reading Time: 1 min read
A A
0
एक दिन मौन के साथ: रविवार की आध्यात्मिक साधना

The image was created by Gemini

आधुनिक जीवन की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि मनुष्य के पास बोलने के लिए शब्द बहुत हैं, लेकिन सुनने के लिए भीतर कोई स्थान नहीं बचा। दिन भर की भागदौड़, संवादों का शोर, सूचनाओं का दबाव और रिश्तों की औपचारिकताएँ—इन सबके बीच मन धीरे-धीरे थक जाता है, बिना यह समझे कि उसे थकाया किसने।

ऐसे समय में रविवार केवल एक अवकाश नहीं रह जाता, बल्कि वह एक अवसर बन सकता है—स्वयं को फिर से सुनने का, और भीतर फैले शोर को धीरे-धीरे शांत करने का। इसी संदर्भ में मौन एक साधना बन जाता है, कोई कठिन नियम नहीं, बल्कि अपने भीतर लौटने का सरल मार्ग।

मौन का अर्थ केवल शब्दों का न होना नहीं है। मौन का वास्तविक अर्थ है—मन की उस दौड़ को रोकना, जिसमें हम हर क्षण किसी न किसी विचार, प्रतिक्रिया या चिंता के पीछे भागते रहते हैं। जब बाहरी शब्द थमते हैं, तभी भीतर की आवाज़ स्पष्ट होने लगती है। और यही वह क्षण होता है जब मनुष्य स्वयं से पहली बार सच में मिलता है।

रविवार की सुबह इस साधना के लिए सबसे उपयुक्त मानी जा सकती है। सप्ताह भर की थकान के बाद जब जीवन थोड़ा ठहरता है, तब हम अपने भीतर झांकने की स्थिति में आते हैं। यदि इस दिन कुछ समय के लिए भी हम अनावश्यक बातचीत, मोबाइल की निरंतरता और बाहरी शोर से स्वयं को दूर कर लें, तो एक अद्भुत परिवर्तन अनुभव किया जा सकता है।

यह परिवर्तन अचानक नहीं आता। प्रारंभ में मन बेचैन होता है, विचार अधिक तेज़ी से दौड़ते हैं, और भीतर एक अजीब-सी असहजता महसूस होती है। पर यही वह चरण है जहाँ साधना शुरू होती है। धीरे-धीरे मन अपनी आदतों से पीछे हटने लगता है और एक गहरी शांति आकार लेने लगती है।

मौन हमें यह भी सिखाता है कि हर उत्तर शब्दों में नहीं होता। कई बार जो हम दूसरों से कहना चाहते हैं, वह हम स्वयं को भी ठीक से नहीं समझा पाते। लेकिन जब हम मौन में बैठते हैं, तो वही अनकहे प्रश्न भीतर से उत्तर देने लगते हैं। यह उत्तर तर्क से नहीं, अनुभव से आते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो मौन केवल विश्राम नहीं है, यह जागरूकता है। यह वह स्थिति है जहाँ मनुष्य बाहरी संसार से कुछ दूरी बनाकर अपने वास्तविक स्वरूप के निकट आता है। यही वह बिंदु है जहाँ ध्यान का जन्म होता है, और वहीं से आत्म-समझ की यात्रा प्रारंभ होती है।

रविवार को यदि इस साधना को जीवन में स्थान दिया जाए, तो यह केवल एक दिन की प्रक्रिया नहीं रहती, बल्कि पूरे सप्ताह के मानसिक संतुलन का आधार बन सकती है। यह हमें अधिक धैर्यवान, अधिक स्पष्ट और अधिक शांत बनाती है।

अंततः मौन कोई दूरी नहीं, बल्कि एक निकटता है—अपने आप से। और शायद रविवार हमें यही याद दिलाने आता है कि जीवन को समझने के लिए कभी-कभी शब्दों की नहीं, मौन की आवश्यकता होती है।

Previous Post

आज का राशिफल – 3 मई 2026

Next Post

समर कैंप: बच्चों की ज़रूरत या केवल एक बाज़ार का आकर्षण?

Next Post
समर कैंप: बच्चों की ज़रूरत या केवल एक बाज़ार का आकर्षण?

समर कैंप: बच्चों की ज़रूरत या केवल एक बाज़ार का आकर्षण?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Posts

  • अब प्रदर्शन से तय होगी रैंकिंग, बीएफआई ने बनाया नया फ्रेमवर्क
  • “हमारी टीम में चैंपियन बनने की क्षमता”: हरमनप्रीत कौर का टी20 वर्ल्ड कप स्क्वाड पर भरोसा
  • सान्या मल्होत्रा की ‘पगलैट-2’ पर काम शुरू, नेटफ्लिक्स पर ही होगी रिलीज
  • ऊषा मंगेशकर को सताती है लता और आशा की याद, बोलीं—“अकेलापन अब जीवन का हिस्सा बन गया”
  • खाने को वैकल्पिक बनाने की तैयारी में एयर इंडिया, सस्ता हो सकता है हवाई टिकट
Stock Market Today by TradingView
  • About
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Call us: +91 98330 26960
No Result
View All Result
  • मुख्य समाचार
  • देश
    • राज्य-शहर
  • विदेश
  • बिजनेस
  • मनोरंजन
  • जीवंत
  • ENGLISH

Copyright © 2020 ON THE DOT

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In