भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए विविध व्रतों का उल्लेख है। उनमें प्रमुख व्रत प्रदोष का है। चन्द्रमास के दोनों पक्षों में प्रदोष व्यापिनी त्रयोदशी तिथि पर यह व्रत रखा जाता है। अधिमास के शुक्लपक्ष का प्रदोष व्रत अंग्रेजी तारीख के अनुसार 30 जुलाई को पड़ेगा। रविवार के कारण इसे रवि प्रदोष कहा जाएगा।
ज्योतिषी विमल जैन ने बताया कि त्रयोदशी तिथि 30 जुलाई को सुबह 10: 35 बजे लगेगी और 31 जुलाई को प्रातः 07:27 बजे तक रहेगी। प्रदोष व्रत 30 जुलाई को रखना शास्त्र सम्मत है। रवि प्रदोष व्रत आयु, आरोग्य, सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है। उन्होंने बताया कि शांति एवं रक्षा के लिए सोम प्रदोष व्रत, मनोकामना पूर्ति के लिए बुध प्रदोष, विजय एवं लक्ष्य प्राप्ति के लिए गुरु प्रदोष, आय के लिए शुक्र प्रदोष व्रत तथा पुत्र प्राप्ति के लिए शनि प्रदोष व्रत रखा जाता है।
प्रदोष व्रत पूजा- विधि
- सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
- स्नान करने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र पहन लें।
- घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
- अगर संभव है तो व्रत करें।
- भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक करें।
- भगवान भोलेनाथ को पुष्प अर्पित करें।
- इस दिन भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा भी करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
- भगवान शिव को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
- भगवान शिव की आरती करें।
- इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

