नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी आशंकाओं के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) से जुड़े सूत्रों ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि रूस से आने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति में कोई कमी दर्ज नहीं की गई है और आपूर्ति व्यवस्था सामान्य बनी हुई है।
सूत्रों के अनुसार, भारत वर्तमान में पेट्रोलियम उत्पादों में अधिशेष की स्थिति में है और कई उत्पादों का निर्यात भी किया जा रहा है। इसके साथ ही देश में कुछ खुदरा पेट्रोल पंपों पर बिक्री में बढ़ोतरी जरूर देखी जा रही है, लेकिन इसका कारण आपूर्ति संकट नहीं बल्कि मौसमी मांग और बाजार में कीमतों का बदलाव है।
सूत्रों ने बताया कि कुछ क्षेत्रों में डीजल की मांग में वृद्धि देखी गई है, जिसका प्रमुख कारण फसल कटाई का मौसम है। इसके अलावा निजी तेल विपणन कंपनियों के पंपों की तुलना में सरकारी रिटेल आउटलेट्स पर कीमतें कम होने के कारण उपभोक्ताओं का रुझान वहां बढ़ा है।
जानकारी के अनुसार, निजी कंपनियों की तुलना में कुछ स्थानों पर कीमतों में लगभग पाँच रुपये प्रति लीटर का अंतर देखा जा रहा है, जिससे ग्राहक सरकारी पंपों की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं। वहीं औद्योगिक और संस्थागत खरीदारों की बिक्री, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अनुरूप लगभग बीस रुपये प्रति लीटर अधिक दर पर होती है, उसमें भी कमी दर्ज की गई है, जिसका असर सरकारी पंपों की बिक्री पर दिखाई दे रहा है।
इस बीच इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड ने भी देशभर में ईंधन आपूर्ति को लेकर स्थिति सामान्य होने का आश्वासन दिया है। कंपनी ने कहा है कि उसकी सप्लाई इकाइयाँ और फील्ड टीमें बढ़ती मांग के बीच खुदरा आउटलेट्स पर पर्याप्त ईंधन उपलब्ध कराने के लिए लगातार समन्वय में काम कर रही हैं।
कंपनी ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे किसी भी तरह की घबराहट में ईंधन की अनावश्यक खरीदारी न करें और सामान्य आवश्यकता के अनुसार ही वाहन में ईंधन भरवाएँ।
कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में हाल के दिनों में उतार-चढ़ाव देखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति मार्गों—विशेषकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य—को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।













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