डेस्क : भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सशस्त्र संघर्षों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा को अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने का केंद्रीय तत्व बताया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथानेनी ने कहा कि नागरिकों की मौत के प्रति “शून्य सहनशीलता” की नीति अपनाई जानी चाहिए।
सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा विषय पर आयोजित वार्षिक खुली बहस को संबोधित करते हुए परवथानेनी ने इस महीने UNSC की अध्यक्षता संभालने पर China को बधाई दी। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासचिव की रिपोर्ट और वक्ताओं की टिप्पणियों की भी सराहना की।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में 20 सशस्त्र संघर्षों में दर्ज नागरिक मौतों की संख्या 37,000 से अधिक रही। हालांकि लगातार तीन वर्षों की वृद्धि के बाद इसमें पहली बार गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन आंकड़े अब भी चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि नागरिक हताहतों, विस्थापन, महत्वपूर्ण ढांचों के विनाश तथा अस्पतालों, स्कूलों, चिकित्साकर्मियों और मानवीय सहायता कर्मियों पर हमले गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
भारत की ओर से परवथानेनी ने कहा कि संघर्ष में शामिल सभी पक्षों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करते हुए सुरक्षित और निर्बाध मानवीय सहायता पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि UNSC प्रस्ताव 2286 को अपनाए जाने के एक दशक बाद भी नागरिक सुविधाओं और मानवीय कर्मियों पर लगातार हो रहे हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के प्रति सम्मान में गंभीर गिरावट को दर्शाते हैं।
उन्होंने शहरी क्षेत्रों में विस्फोटक हथियारों के इस्तेमाल के लिए ड्रोन के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता जताई। परवथानेनी ने कहा कि मिसाइलों, बमों और अन्य विस्फोटक हथियारों का आबादी वाले क्षेत्रों में इस्तेमाल नागरिकों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्वायत्त प्रणालियों जैसी उभरती तकनीकों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के अनुरूप होना चाहिए तथा नागरिकों को अनजाने नुकसान से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय आवश्यक हैं।
भारत ने इस दौरान आतंकवाद, विशेषकर सीमा पार आतंकवाद, पर भी कड़ा रुख अपनाया। परवथानेनी ने कहा कि भारत दशकों से सीमा पार आतंकवाद का शिकार रहा है और आतंकवाद को समर्थन, शरण या प्रोत्साहन देने वाले देशों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद अपने सभी रूपों में दुनिया भर के नागरिकों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और किसी भी कारण या शिकायत के आधार पर नागरिकों पर जानबूझकर किए गए हमलों को उचित नहीं ठहराया जा सकता।













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