डेस्क:महागठबंधन के दो अहम सहयोगी दल आरजेडी और कांग्रेस ने मंगलवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मतदाता पुनरीक्षण पर चुनाव आयोग पर एक बार फिर से सवाल उठाए। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने कहा कि 26 जुलाई तक वोटर वेरिफिकेशन का काम पूरा होना है, 6 दिन बीत चुके हैं और 99 फीसदी लोगों के यहां प्रक्रिया शुरू भी नहीं हुई है। ऐसे में बाकी बचे दिनों में यह प्रक्रिया कैसे पूरी होगी? मुख्य चुनाव आयुक्त को हमारी सभी बातों का जवाब देना चाहिए, मिस्टर इंडिया न बनें। गरीबों का नाम वोटर लिस्ट से हटाने की साजिश की जा रही है।
तेजस्वी ने कहा कि आयोग खुद कंफ्यूज है और लगातार समय, तिथि और पुनरीक्षण को लेकर अपने आदेश बदल रहा है। जिससे ऐसा लग रहा है कि पूरी रणनीति किसी राजनीतिक दल से साझा की गई है। चुनाव आयोग से समय मांगा गया है, लेकिन अभी तक कोई समय नहीं दिया गया है। इतने गंभीर मुद्दे पर भी आयोग गंभीर नहीं है और हमारे द्वारा लगातार सवाल उठाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वेरिफिकेशन के लिए जो 11 डॉक्यूमेंट मांगे गए हैं, वो बिहार के कितने लोगों के पास होंगे। 2004 के बाद वाले मतदाताओं को माता-पिता का पहचान पत्र देना होगा, जबकि आधार और नरेगा कार्ड की मान्यता नहीं दी गई है। तेजस्वी ने निर्वाचन आयोग से पूछा कि कितने लोगों के पास ये दस्तावेज हैं। भारत सरकार को भी यह बताना चाहिए कि 11 दस्तावेज कितने बिहारियों के पास हैं और कितने प्रतिशत लोगों के पास पूरे दस्तावेज हैं।
जन्म प्रमाण पत्र कितने प्रतिशत लोगों के पास हैं, मान्यता प्राप्त बोर्ड द्वारा मैट्रिक प्रमाण पत्र कितने लोगों के पास हैं, और जातीय प्रमाण पत्र कितने लोगों को निर्गत किए गए हैं, इसका आंकड़ा सरकार जारी करे। तेजस्वी ने यह भी सवाल उठाया कि यह पुनरीक्षण सिर्फ पूरे देश में क्यों नहीं हो रहा है और पूरी प्रक्रिया दो साल पहले क्यों नहीं शुरू हुई।
उन्होने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद भी प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। अगर फर्जी वोटर आए हैं, तो पहले प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू हुई। बीएलओ को तीन बार मतदाता के पते पर जाने का निर्देश दिया गया है और मतदाता को भौतिक रूप से उपस्थित रहना पड़ेगा। जो लोग रोजी-रोटी कमाने या मजदूरी करने बाहर जाते हैं, वे चुनाव के दौरान कैसे आएंगे? अचानक पहचान के लिए कैसे आयेंगे? तीन करोड़ लोग पलायन कर मजदूरी करने बाहर जाते हैं और ऐसे सभी लोगों का नाम वोटर लिस्ट से काट दिया जाएगा, जिनमें अधिकांश दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग होंगे।













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