नई दिल्ली:दिल्ली हाईकोर्ट ने गो फर्स्ट एयरलाइन कंपनी के विमान आपूर्तिकर्ताओं को महीने में कम-से-कम दो बार अपने विमानों का मुआयना करने के साथ रखरखाव की भी मंजूरी दे दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि एयरलाइन को लीज पर विमान मुहैया कराने वाली कंपनियों का यह दावा वाजिब है कि उनके विमान मूल्यवान होने के साथ कई उपकरणों से लैस हैं। लिहाजा मेंटेनेंस, उनकी निगरानी में ही किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही न्यायमूर्ति तारा वितस्ता गंजू ने गो फर्स्ट और उसके अंतरिम समाधान पेशेवर को विमानों के किसी भी कलपुर्जे को हटाने, बदलने या बाहर निकालने से भी रोक दिया। ऐसा केवल तभी किया जा सकता है जब उस विमान की मालिक कंपनी की पूर्व-अनुमति ली गई हो।
दायर की गई थी याचिका: कोर्ट ने यह अंतरिम आदेश गो फर्स्ट को विमानों की आपूर्ति करने वाली कई कंपनियों की तरफ से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद दिया है। इन विमान आपूर्तिकर्ताओं ने नियामक डीजीसीए से अपने विमानों को नॉन-रजिस्टर कराने की भी अर्जी लगाई हुई है। इस संदर्भ में कोर्ट ने डीजीसीए से कहा कि आपूर्तिकर्ता कंपनियों, उनके कर्मचारियों और एजेंटों को हवाई अड्डों पर खड़े विमानों तक जाने की मंजूरी दी जाए ताकि तीन दिन के भीतर उनका मुआयना किया जा सके।
3 मई से ठप है एयरलाइन सर्विस: बता दें कि गो फर्स्ट ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए 3 मई से ही विमानों का परिचालन बंद किया हुआ है। इस बीच मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण में भी गया जिसने दिवाला कार्यवाही चलाने की मंजूरी देते हुए समाधान पेशेवर भी नियुक्त कर दिया है। इस दौरान एयरलाइन को पट्टे पर विमान देने वाली कंपनियों ने अपने विमानों को हटाने का नोटिस भेज दिया। एयरलाइन विमान लौटाने से इनकार करते हुए कह चुकी है कि ऐसा करना 7,000 कर्मचारियों वाली एयरलाइन कंपनी को खत्म करने की तरह होगा। इस मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन अगस्त की तारीख तय की गई है।













मुख्य समाचार
देश
राज्य-शहर
विदेश
बिजनेस
मनोरंजन
जीवंत

