डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच जारी शांति वार्ता के विफल होने के बाद पाकिस्तान की रणनीति में नया बदलाव देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ने एक बार फिर कश्मीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
वार्ता विफल होने के बाद बदला रुख
सूत्रों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिशें सफल नहीं हो सकीं। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान खुद को एक अहम कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में स्थापित करना चाहता था, लेकिन बातचीत बेनतीजा रहने से उसकी यह कोशिश कमजोर पड़ गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसी असफलता के बाद पाकिस्तान ने एक बार फिर अपना ध्यान कश्मीर मुद्दे की ओर मोड़ दिया है, जो उसकी पारंपरिक विदेश नीति का हिस्सा रहा है।
कश्मीर मुद्दा फिर चर्चा में क्यों?
पाक सेना प्रमुख असीम मुनीर ने हालिया बयान में कश्मीर का जिक्र करते हुए इसे क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा मुद्दा बताया। विश्लेषकों के अनुसार, इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं—
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर ध्यान आकर्षित करने की कोशिश
- घरेलू राजनीतिक समर्थन को मजबूत करना
- भारत पर कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति
पाकिस्तान की रणनीति पर नजर
कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान अब तीन स्तरों पर अपनी रणनीति को आगे बढ़ा सकता है—
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रियता: कश्मीर मुद्दे को फिर से उठाना
- सुरक्षा नैरेटिव: क्षेत्रीय तनाव को वैश्विक मंच पर पेश करना
- राजनीतिक संतुलन: मध्य पूर्व में कमजोर पड़ती भूमिका की भरपाई करना
भारत का रुख स्पष्ट
भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इस पर किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा। ऐसे में पाकिस्तान के इस कदम को भारत की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया मिल सकती है।













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