जयपुर : आध्यात्मिक चेतना, नैतिक मूल्यों और अहिंसा के संदेश से ओतप्रोत वातावरण में संत परंपरा के उज्ज्वल प्रतीक आचार्य श्री महाश्रमण जी का 53वाँ दीक्षा दिवस जयपुर स्थित महाप्रज्ञ इंटरनेशनल स्कूल के संबोधि सभागार में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मुनि श्री तत्त्व रुचि जी “तरूण” ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संत परंपरा में आचार्य श्री महाश्रमण जी का स्थान अत्यंत उच्च और प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि आचार्य श्री न केवल एक संत हैं, बल्कि वे जीवन मूल्यों के जीवंत उदाहरण हैं। उनकी पदयात्राएं देश-विदेश में नशामुक्ति, नैतिकता और अहिंसा का सशक्त संदेश दे रही हैं।
मुनि श्री ने आगे कहा कि “अहिंसा यात्रा” के माध्यम से आचार्य श्री महाश्रमण जी समाज में मानवीय एकता, सद्भाव और नैतिक जागरूकता का विस्तार कर रहे हैं। उनका जीवन संयम, शांति और आत्मानुशासन का अनुपम उदाहरण है, जो विश्व मानवता को दिशा प्रदान कर रहा है।
इस अवसर पर मुनि श्री संभव कुमार जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण जी करुणा की साक्षात गंगोत्री हैं। उनका संपूर्ण जीवन मानवता की सेवा और परोपकार के लिए समर्पित है।
उन्होंने यह भी कहा कि आचार्य श्री महाश्रमण जी केवल श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञाता ही नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन में गीता के सिद्धांतों का प्रत्यक्ष अनुभव होता है। वे निष्काम कर्मयोग और स्थितप्रज्ञता के जीवंत प्रतीक हैं, जिनके आचार, विचार और व्यवहार में अद्भुत सामंजस्य देखने को मिलता है।
कार्यक्रम के दौरान जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा की ओर से मास्टर रतन जी जैन तथा तेरापंथ महिला मंडल (सी-स्कीम) की अध्यक्षा श्रीमती कनक जी आंचलिया ने भक्ति गीतों के माध्यम से अपनी श्रद्धा अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ तीर्थंकर पदम् प्रभु की स्तुति से हुआ, जिसके पश्चात तेरापंथ संविधान का पाक्षिक वाचन भी किया गया।
इस आध्यात्मिक आयोजन ने उपस्थित श्रद्धालुओं के मन में संयम, शांति और मानवता के प्रति नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार किया।













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