डेस्क : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और चुनाव आयोग के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। टीएमसी ने चुनाव आयोग के उस निर्देश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें मतगणना के दौरान काउंटिंग सुपरवाइजर के रूप में केवल केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती का प्रावधान किया गया है।
टीएमसी का आरोप है कि यह निर्णय राज्य के कर्मचारियों को प्रक्रिया से बाहर कर देता है और इससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। पार्टी का कहना है कि राज्य प्रशासन की अनदेखी संघीय ढांचे की भावना के विपरीत है और इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।
इससे पहले इस मामले को लेकर दायर याचिका पर कलकत्ता हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार करते हुए चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखा था। हाई कोर्ट के इस निर्णय के बाद टीएमसी ने सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है और मामले की जल्द सुनवाई की मांग की है, क्योंकि मतगणना की तारीख नजदीक है।
चुनाव आयोग का पक्ष है कि काउंटिंग प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती जरूरी है। आयोग का मानना है कि इस कदम से किसी भी तरह के स्थानीय दबाव या प्रभाव को रोका जा सकेगा।
मतगणना 4 मई को प्रस्तावित है और उससे पहले यह विवाद राजनीतिक रूप से काफी अहम बन गया है। अब इस पूरे मामले पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट के रुख पर निर्भर करेगा, जिस पर सभी दलों की नजरें टिकी हुई हैं।













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